भारत में योजनाओं का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां पंचवर्षीय योजनाएं भी देखने को मिलती हैं। ये योजनाएं देश के आर्थिक और सामाजिक विकास का मुख्या आधार कही जाती थीं। दरअसल, 1947 में आजादी के बाद भारत में संसाधनों की कमी के साथ बहुत अधिक गरीबी थी। ऐसे में देश को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए सोवियत संघ (USSR) की तर्ज पर 'नियोजित अर्थव्यवस्था' का मॉडल अपनाया गया था।
कब हुआ योजना आयोग का गठन
योजना आयोग का गठन 15 मार्च, 1950 को किया गया था। भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हुआ करते थे। योजना आयोग का मुख्य काम देश के संसाधनों का आकलन करने के साथ अगले 5 वर्षों के लिए प्राथमिकताएं तय करना था।
भारत की प्रमुख पांच वर्षीय योजनाएं
इस लिस्ट में हमने भारत की प्रमुख पांच वर्षीय योजनाओं के वर्ष के साथ-साथ उनके उद्देश्य और उपलब्धियों की भी जानकारी दी है।
| योजना | मुख्य उद्देश्य | महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां |
| पहली (1951-56) | कृषि विकास: सिंचाई और खेती पर जोर दिया। | इस दौरान भाखड़ा नांगल और हीराकुंड जैसे बड़े बांधों की शुरुआत हुई। |
| दूसरी (1956-61) | औद्योगीकरण: भारी उद्योगों का विकास किया गया। | ऐसे में भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में बड़े-बड़े स्टील प्लांट स्थापित हुए। |
| तीसरी (1961-66) | आत्मनिर्भरता: कृषि और उद्योग पर जोर दिया गया। | यह योजना 1962 (चीन युद्ध) और 1965 (पाक युद्ध) के कारण विफल हुई। क्योंकि, इन युद्धों से अर्थव्यवस्था का नुकसान हुआ था। |
| चौथी (1969-74) | स्थिरता: बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। | इस दौरान देश के 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण और 'हरित क्रांति' का विस्तार किया गया। |
| पांचवीं (1974-78) | गरीबी हटाओ: रोजगार और न्याय पर ध्यान दिया गया। | 20-सूत्रीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। हालांकि, यह योजना पांच के बजाय चार वर्ष ही चली। |
| छठी (1980-85) | आधुनिकीकरण: गरीबी निवारण पर ध्यान केंद्रित किया गया। | इस दौरान नाबार्ड (NABARD) की स्थापना की गई। |
| आठवीं (1992-97) | मानव संसाधन: LPG मॉडल पर केंद्रित। | नई आर्थिक नीति, जिसमें उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण पर ध्यान दिया गया। |
| बारहवीं (2012-17) | सतत विकास: तीव्र और समावेशी योजना थी। | यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। इसके बाद कोई नई पंचवर्षीय योजना नहीं आई। |
2014 में समाप्त हुआ योजना आयोग
सरकार ने 2014 में योजना आयोग को समाप्त कर 1 जनवरी, 2015 को नीति आयोग की स्थापना की। योजना आयोग में केंद्र के पास अधिक शक्ति थी, जबकि नीति आयोग राज्य की सहभागिता और सहकारी संघवाद पर आधारित है। वहीं, यह 5 साल के बजाय 15 वर्ष का विजन रखता है।
पढ़ेंः भारत के 519 गांव और 12 जिलों को जोड़ता है Ganga Expressway, यहां जानें एक्सप्रेस से जुड़े खास फीचर्स