भारत में इन दिनों बेहाल करने वाली गर्मी पड़ रही है। प्रचंड गर्मी की वजह से अमूमन सभी प्रमुख शहरों में तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है। बीते दिनों उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है।
इस कड़ी में मौसम विभाग ने कुछ राज्यों को लेकर हीटवेव की चेतावनी जारी कर रखी है। हीटवेव एक प्रकार की खतरनाक मौसमी स्थिति होती है। जब किसी क्षेत्र में तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है और यह कम से कम 2 से 3 तीन दिनों तक बना रहता है, तो इसे हीटवेव कहा जाता है।
कब होती है हीटवेव की घोषणा
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, यदि मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान कम से कम 40°C और पहाड़ी इलाकों में यह कम से कम 30°C तक पहुंचे। साथ ही, तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक हो, तो इसे 'हीटवेव' और यदि 6.4°C से अधिक हो, तो इसे 'सीवियर (गंभीर) हीटवेव' की श्रेणी में रखा जाता है।
भारत में क्यों पड़ रही है अधिक गर्मी ?
भारत में इस समय अधिक गर्मी पड़ने की पीछे वायुमंडलीय और भौगोलिक कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैः
अल नीनो (El Niño) का प्रभाव
प्रशांत महासागर में जब भी समुद्र की सतह गर्मी होती है, तो इससे अल नीनो वाली स्थिति बनती है। इससे वैश्विक तापमान बढ़ता है और मानसून कमजोर बनता है। ऐसे में गर्मी का प्रकोप अधिक और लंबे समय के लिए बढ़ जाता है।
एंटी-साइक्लोन (Anticyclone) की स्थिति
भारत के ऊपर उच्च वायुदाब वाला क्षेत्र बनने की वजह से हवा नीचे की ओर हो जाती है। इस वजह से बादल नहीं बन पाते हैं और सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं। साथ ही, इस स्थिति में हवा भी गर्म हो जाती है और एक जगह ट्रैप होती है।
हवा हो जाती है शुष्क
इस स्थिति में थार मरुस्थल और पाकिस्तान से आने वाली शुष्क हवाएं उत्तर और मध्य भारत में प्रवेश कर रही हैं। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ भी कम सक्रिय है, जिससे बारिश वाली स्थिति नहींं बन रही है।
जलवायु परिवर्तन की पड़ा है प्रभाव
Climate Change के कारण हीटवेव की फ्रीक्वेंसी बढ़ गई है। इस बार मार्च के अंत में ही गर्मी की शुरुआत हो गई थी। साथ ही, अब तक कई बार रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया जा चुका है।
अर्बन हीट आइलैंड से बढ़ रही गर्मी
शहरों में अधिक इमारतें हैं, जो कि दिनभर गर्मी को सोखती हैं। वहीं, यहां डामर की सड़कें भी कुछ यही काम करती हैं, जो कि रात में गर्मी छोड़ने का काम करती हैं, जिससे शहरों में अधिक गर्मी होती है, जबकि गांव में रात के समय शहरों के मुकाबले कम तापमान रहता है।
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