ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) ने बड़ा फैसला लेते हुए ओपेक यानी 'ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज' और OPEC+ से अलग होने का निर्णय लिया है। ओपेक दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का संगठन है, जिसकी स्थापना साल 1960 में हुई थी, जबकि इसका मुख्यालय वियना में स्थित है।
ओपेक (OPEC) क्या है?
ओपेक यानी (Organization of Petroleum Exporting Countries- OPEC) एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें प्रमुख तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इसका गठन वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को संतुलित रखना, उपभोक्ताओं को नियमित सप्लाई सुनिश्चित करना और तेल उद्योग में निवेशकों को उचित लाभ दिलाने के लिए किया गया है। यह संगठन अपने सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करता है ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
क्या है ओपेक का इतिहास
ओपेक की स्थापना 14 सितंबर 1960 को बगदाद में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला थे। इन देशों ने पश्चिमी तेल कंपनियों के बढ़ते नियंत्रण के खिलाफ एकजुट होकर अपने हितों की रक्षा के लिए इस संगठन का गठन किया। 1970 के दशक के तेल संकट के दौरान ओपेक ने उत्पादन घटाकर कीमतों को बढ़ाया, जिससे वैश्विक ऊर्जा राजनीति पर इसका प्रभाव काफी बढ़ गया।
कहां है इसका मुख्यालय
ओपेक का मुख्यालय वियना में स्थित है। शुरुआत में यह जेनेवा में था, लेकिन 1965 में वियना में स्थानांतरित कर दिया गया। संगठन का प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय ‘कांफ्रेंस’ है, जिसमें सभी सदस्य देश शामिल होते हैं और उत्पादन कोटा तय करते हैं। दैनिक कार्यों का संचालन सचिवालय करता है, जिसका नेतृत्व एक महासचिव करता है।
वर्तमान सदस्य और OPEC+ की भूमिका
साल 2026 तक ओपेक के 12 सदस्य देश हैं, जिनमें सऊदी अरब, यूएई, ईरान, इराक, कुवैत, नाइजीरिया आदि शामिल हैं। ओपेक के साथ एक विस्तारित समूह OPEC+ भी काम करता है, जिसमें रूस जैसे गैर-ओपेक देश शामिल हैं। यह गठबंधन 2016 में बना था, जिसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है।
ओपेक के सदस्य देशों की लिस्ट (2026):
-
अल्जीरिया
-
इक्वेटोरियल गिनी
-
गैबॉन
-
ईरान
-
इराक
-
कुवैत
-
लीबिया
-
नाइजीरिया
-
कांगो गणराज्य
-
सऊदी अरब
-
वेनेजुएला
-
यूएई (बाहर होने की घोषणा)
यूएई के बाहर निकलने की वजह
खाड़ी देश UAE ने 28 अप्रैल 2026 को ओपेक और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा की। इसका मुख्य कारण अपनी तेल उत्पादन नीतियों पर अधिक स्वतंत्र नियंत्रण पाना, अर्थव्यवस्था में विविधता लाना और बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के अनुसार खुद को ढालना बताया गया है। यूएई लंबे समय से इस संगठन का प्रमुख सदस्य रहा है।
वैश्विक बाजार और भारत पर प्रभाव
यूएई के बाहर निकलने से ओपेक की एकजुटता पर असर पड़ सकता है और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां नीति निर्माताओं को रणनीतिक भंडारण, विविध आपूर्ति स्रोत और बेहतर वित्तीय योजना पर अधिक ध्यान देना होगा।