पश्चिम बंगाल में बनेंगे 5 नए जिले, बदलेगा राज्य का प्रशासनिक नक्शा, देखें सभी नाम
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में 5 नए जिले बनाये जाने की घोषणा की है, वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने पांच नए जिलों के गठन का प्रस्ताव रखा।
पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़े फैसले के तहत राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने पांच नए जिलों के गठन का प्रस्ताव रखा। इस कदम को राज्य के प्रशासनिक इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक माना जा रहा है।
वहीं सरकार का मानना है कि नए जिलों के गठन से प्रशासन को लोगों के और करीब लाया जा सकेगा, सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और तेजी से बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।
पश्चिम बंगाल में बनेंगे ये 5 नए जिले
बजट में जिन पांच नए जिलों की घोषणा की गई है, वे हैं-
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कोलकाता
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बसीरहाट
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सुंदरबन
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जंगीपुर
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आरामबाग
कोलकाता बनेगा स्वतंत्र जिला
अब तक कोलकाता का प्रशासनिक ढांचा आसपास के उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों से कई स्तरों पर जुड़ा हुआ था, जिससे कई बार प्रशासनिक जटिलताएं पैदा होती थीं। नए फैसले के बाद कोलकाता को एक स्वायत्त जिला बनाकर महानगरीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की योजना है।
सुंदरबन को मिलेगा अलग जिले का दर्जा
दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन क्षेत्रों में शामिल सुंदरबन को भी अलग जिला बनाने का प्रस्ताव है। बंगाल की खाड़ी से सटे इस क्षेत्र की पहचान अपने घने जंगलों, नदियों के जाल और जैव विविधता के लिए है। यह क्षेत्र अक्सर चक्रवातों और समुद्री आपदाओं से प्रभावित होता है।
बसीरहाट में सीमा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
उत्तर 24 परगना जिले से अलग होकर बनने वाला बसीरहाट जिला बांग्लादेश सीमा से लगा हुआ क्षेत्र है। यह क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और सीमापार व्यापार के लिए जाना जाता है। सरकार के अनुसार, नए जिले के गठन से सीमा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा।
जंगीपुर से कम होगा प्रशासनिक दबाव
मुर्शिदाबाद जिले के उत्तरी हिस्से को अलग कर जंगीपुर जिला बनाया जाएगा। यह क्षेत्र बीड़ी उद्योग, रेशम उत्पादन और फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशन के लिए प्रसिद्ध है। घनी आबादी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण प्रशासनिक कार्यों में लंबे समय से दबाव महसूस किया जा रहा था।
आरामबाग को मिलेगा अलग प्रशासनिक ढांचा
हुगली जिले से अलग होकर बनने वाला आरामबाग जिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र सामाजिक सुधारक राजा राममोहन राय से भी जुड़ा रहा है। सरकार का मानना है कि नए जिले के गठन से किसानों, ग्रामीण आबादी और स्थानीय प्रशासन को सीधा लाभ मिलेगा।
बदल जाएगा बंगाल का प्रशासनिक नक्शा
अगर यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है, तो पश्चिम बंगाल का प्रशासनिक नक्शा काफी हद तक बदल जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम केवल जिलों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाना है।
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