कौन थे सम्राट हर्षवर्धन और क्या था उनकी राजधानी का नाम, जानें

Last Updated: Jun 22, 2026, 16:55 IST

सम्राट हर्षवर्धन प्राचीन भारत के महान राजाओं में से एक थे। उन्होंने 7वीं शताब्दी में उत्तर भारत पर शासन किया था। उनके काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग कहा जाता है। इस लेख में हम उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।

राजा हर्षवर्धन
राजा हर्षवर्धन

इतिहास के पन्ने पलटने पर हमें महान सम्राट हर्षवर्धन का उल्लेख देखने को मिलता है। उन्होंने 7वीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद शासन किया। यह वह समय था, जब भारत गुप्त राजाओं के पतन के बाद बिखर चुका था। ऐसे में हर्षवर्धन ने एक बड़े साम्राज्य की स्थापना कर देश को स्थिर करने का काम किया। इस लेख में हम उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।

हर्षवर्धन का प्रारंभिक जीवन

हर्षवर्धन का जन्म करीब 590 ईस्वी में हुआ था। वह पुष्यभूति राजवंश से संबंधित थे। उनके पिता प्रभाकरवर्धन थानेश्वर (आधुनिक हरियाणा) के एक शक्तिशाली राजा हुआ करते थे। हर्षवर्धन आसानी से राजा नहीं बने थे, बल्कि उन्हें विपरित परिस्थितियों को के बीच राजा बनाया गया था। क्योंकि, उनके पिता की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई राज्यवर्धन गद्दी पर बैठे थे।

इस दौरान मालवा के राजा देवगुप्त और बंगाल के क्रूर शासक शशांक ने मिलकर हर्षवर्धन की बहन 'राज्यश्री' के पति की हत्या कर राज्यश्री को बंदी बना लिया था। वहीं, जब राज्यवर्धन अपनी बहन को बचाने के लिए पहुंचे, तो शशांक ने धोखे से उन्हें भी मार दिया था। ऐसे में सिर्फ 16 वर्ष की आयु में हर्षवर्धन ने थानेश्वर की कमान संभाली और अपनी बहन को बचाया। बाद में उन्होंने थानेश्वर और कन्नौज को मिलाकर नई राजधानी बनाई।

ऐसे किया साम्राज्य का विस्तार

राजा बनते ही हर्षवर्धन ने 'सकलोत्तरापथनाथ' की उपाधि धारण कर ली थी। उन्होंने एक विशाल सेना बनाई, जिसमें 60,000 हाथी और 1,00,000 घुड़सवार शामिल थे। इस सेना को लेकर हर्षवर्धन ने पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और ओडिशा तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

क्या था नर्मदा का ऐतिहासिक युद्ध

उत्तर भारत को जीतने के बाद जब हर्षवर्धन दक्षिण  भारत की तरफ बढ़े, तो नर्मदा नदी के तट पर उनका सामना चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय से हुआ था। यह युद्ध 618-619 ईस्वी में लड़ा गया था, जिसमें हर्षवर्धन की हार हुई थी। इसके बाद नर्मदा नदी दोनों साम्राज्यों के बीच आधिकारिक सीमा बन गई थी। इस बात का उल्लेख हमें 'एहोल अभिलेख' में मिलता है।

हर्षवर्धन ने की थी इन प्रसिद्ध नाटकों की रचना

हर्षवर्धन सिर्फ योद्धा नहीं थे, बल्कि लेखक भी थे। उन्होंने संस्कृत भाषा में तीन प्रसिद्ध नाटकों की रचना की थी, जो कि रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद है। उनके दरबार में महान गद्यकार बाणभट्ट रहा करते थे, जिन्होंने दुनिया का पहला उपन्यास कादंबरी लिखा था। साथ ही, वह हर्षचरित के भी लेखक थे, जिसमें हर्षवर्धन की जीवनी लिखी गई थी। उनके दरबार में हमें मयूर और दिवाकर जैसे विद्वानों का भी उल्लेख मिलता है।

हर्षवर्धन के काल में ह्वेनसांग आए थे भारत

प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग भी हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत में पहुंचे थे, जिन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी। ह्वेनसांग ने अपनी पुस्तक 'सी-यू-की' में हर्ष के न्यायप्रिय शासन और भारत की समृद्धि के बारे में लिखा है।

इलाहाबाद में करते थे दान

हर्षवर्धन प्रत्येक पांच साल में इलाहाबाद में एक धार्मिक सभा का आयोजन करते थे। इसमें वह अपने पांच सालों का राजकोष और धन व आभूषण गरीबों में दान कर देते थे। हालांकि, 647 ईस्वी में हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं रहा। इस वजह से वर्धन साम्राज्य बिखर गया था।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 22, 2026, 16:55 IST

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