भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां अंग्रेजों का कुल 200 साल का शासन देखने को मिलता है। 1757 में प्लासी के युद्ध से शुरू से हुआ यह सफर 1947 में देश की आजादी में जाकर खत्म हुआ। इस दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश क्राउन ने भारत में अपनी सत्ता काबिज की और भारतीयों पर राज किया।
ब्रिटिश काल में भारत में कई महत्त्वपूर्ण कानून भी बनाए गए थे, जिनमें से एक ‘Regulating Act 1773’ था। ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण एक्ट था, जिससे भारत में संवैधानिक रूप से कई महत्त्वपूर्ण बदलाव हुआ था।
यही वह एक्ट है, जिससे भारत को Supreme Court मिला था और भारत में केंद्रीकृत प्रशासन की नींव रखी गई थी। क्या था यह एक्ट और क्यों लाया गया था, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्या था ‘Regulating Act 1773’
रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ब्रिटिश संसद द्वारा लाया गया था। यह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत में व्यापार कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी पर लगाम लगाने की पहली कोशिश थी, जिससे भारत में कंपनी के व्यापार अधिकार को नियंत्रित किया गया था। ब्रिटिश सरकार ने कंपनी पर कड़े प्रतिबंध लगाने के साथ सत्ता के पदों में भी परिवर्तन किया था। इस एक्ट ने भारत में केंद्रीकृत प्रशासन की नींव रखी थी।

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क्यों लाया गया था ‘Regulating Act 1773’
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1773 तक आते-आते भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी काफी नुकसान में पहुंच गई थी, जबकि कुछ अधिकारी निजी लाभ कमा रहे थे।
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कंपनी के अधिकारी निजी व्यापार करने लगे थे। साथ ही, वे लोगों से रिश्वत भी ले रहे थे।
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1770 में बंगाल में आए अकाल की वजह से कंपनी की आर्थिक हालत खराब हो गई थी।
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ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा ब्रिटिश सरकार से कर्ज लेने की बात की गई थी, जिस पर सरकार द्वारा रेगुलेटिंग एक्ट को लाने का फैसला किया गया था।
‘Regulating Act 1773’ के मुख्य प्रावधान
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सरकार ने बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बना दिया। भारत के पहले गवर्नर जनरल वारेन हास्टिंग बनाए गए। उनकी सहायता के लिए 4 कार्यकारी परिषद् का भी गठन किया गया।
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कंपनी को निजी व्यापार करने और भारतीयों से रिश्वत लेने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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पहले बंगाल, बिहार और मद्रास तीन प्रेसीडेंसी होती थी, लेकिन नए एक्ट के बाद बिहार और मद्रास की प्रेसीडेंसी को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया।
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कलकत्ता में 1774 में फोर्ट विलियम में Supreme Court की स्थापना की गई। इसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे। इनके अलावा तीन अन्य न्यायाधीश भी थे।
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सराकर ने कंपनी को आदेश दिया था कि अब से ब्रिटिश कंपनी भारत के राजस्व, सैन्य और नागरिक मामलों की रिपोर्ट सीधे ब्रिटिश सरकार को सौंपेगी।
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