अवध से लेकर भोजपुरी तक, कितनी हैं हिंदी की बोलियां, जानें यहां

Last Updated: Sep 8, 2026, 13:27 IST

हिंदी भाषा के एक समुद्र की तरह है, जिसमें कई भाषाएं आकर शामिल होती हैं। इसमें प्रमुख रूप से अवध से लेकर भोजपुरी भाषा तक शामिल है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर हिंदी की कितनी बोलिया हैं।

हिंदी भाषा
हिंदी भाषा

भारत में यदि सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा की बात करें, तो यह हिंदी भाषा है। यह सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव भाव से भी है, जिसे बोलने पर भाव अपने आप आ जाता है और लोगों को अपनापन महसूस होता है। हिंदी भाषा का परिवार बहुत बड़ा है, जिसमें कई बोलियां शामिल हैं। भाषा विद्वानों और जॉर्ज ग्रियर्सन के वर्गीकरण के अनुसार, हिंदी की 5 उपभाषाएं और करीब 17-18 प्रमुख बोलियां हैं।

हिंदी की 5 उपभाषा कौन-सी हैं

हिंदी की 5 उपभाषाएं हैं, जिन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बोला जाता है, जो कि इस प्रकार हैंः

पश्चिमी हिंदी: यह हिंदी की खड़ी बोली है, जो कि कौरवी, ब्रजभाषा, हरियाणवी (बांगरू), बुंदेली, कन्नौजी है।

पूर्वी हिंदी: इस उपभाषा में अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी शामिल है।

राजस्थानी हिंदी: इसमें मारवाड़ी, जयपुरी (ढूंढाड़ी), मेवाती और मालवी शामिल है।

पहाड़ी हिंदी: गढ़वाली, कुमाऊंनी और क्षेत्र के आधार पर मंडियाली या नेपाली। 

बिहारी हिंदी: भोजपुरी, मगही और मैथिली।

कौन-सी बोली सबसे अधिक लोकप्रिय है

यदि अवधी, ब्रज, मैथिली, मारवाड़ी और भोजपुरी जैसी प्रमुख बोलियों की तुलना करें, तो जनसंख्या, वैश्विक पहुंच और सिनेमा व संगीत के लिहाज से भोजपुरी सबसे ज्यादा लोकप्रिय और बोली जाने वाली बोली है।

हालांकि, साहित्यिक इतिहास और प्रयोग के क्षेत्र के आधार पर तीनों प्रमुख बोलियां-अवधी, ब्रज और भोजपुरी तीनों ही प्रमुख तौर पर बोली जाती हैं।

सबसे अधिक बोले जाने वाली हिंदी की बोली

भारत में भोजपुरी बोली को पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार, झारखंड और विदेशों को मिलाकर 15 करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और गयाना जैसे देशों में भोजपुरी आज भी वहां बोली जाती है। मॉरीशस में तो 'भोजपुरी गीतों' को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) का दर्जा प्राप्त है।

अवधी का भी है बोलबाला

आज भले ही आम बोलचाल में भोजपुरी की पहुंच अधिक हो, लेकिन ऐतिहासिक और साहित्यिक पहलू से अवधी भी महत्त्वपूर्ण है। आपको बता दें कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने 'श्रीरामचरितमानस' और मलिक मोहम्मद जायसी ने 'पद्मावत' की रचना अवधी में ही की थी। यह मुख्य रूप से लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और आसपास के अवध क्षेत्र में बोली जाती है।

ब्रजभाषा का महत्त्व

इतिहास उठाकर देखें, तोसूरदास, रसखान और मीराबाई ने अपने पदों की रचना ब्रजभाषा में ही की है। एक समय पूरे उत्तर भारत की साहित्यिक और शास्त्रीय भाषा ब्रज ही हुआ करती थी।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Sep 8, 2026, 13:27 IST

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