दिल्ली में कितनी ऊंची बना सकते हैं बिल्डिंग, निर्माण को लेकर क्या हैं नियम, जानें

Last Updated: Sep 7, 2026, 14:50 IST

दिल्ली में इमारतों के निर्माण और उनकी सुरक्षा को यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज, दिल्ली नगर निगम एक्ट और राष्ट्रीय भवन संहिताके तहत नियंत्रित किया जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर दिल्ली में बिल्डिंग निर्माण को लेकर क्या नियम हैं और कितनी ऊंची इमारत बनाने की अनुमति है।

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नई दिल्ली देश की राजधानी है, तो दिल्ली देश का दिल कही जाती है। यहां हर किसी का सपना होता है कि उसका खुद का अपना आशियाना हो। बीते वर्षों में यहां दिल्ली फायर सर्विस अमेंडमेंट रूल्स और मास्टर प्लान के बाद बिल्डिंग सुरक्षा से जुड़े नियमों को और कड़ा किया गया है। इस लेख में हम जानेंगे कि दिल्ली में कितनी ऊंची बिल्डिंग बनाई जा सकती है और निर्माण के क्या नियम हैं। 

कितनी ऊंची इमारत की है अनुमति 

दिल्ली में बिल्डिंग की ऊंचाई जमीन के श्रेणी पर तय करती है। यदि रिहायशी जमीन पर निजी बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है, तो बिना स्टिल्ट पार्किंग वाली बिल्डिंग 15 मीटर तक ऊंची हो सकती है। वहीं, यदि स्टिल्ट पार्किंग भी है, तो इसकी अधिकतम ऊंचाई 17.5 मीटर तक हो सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि बिल्डिंग की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक है, तो फायर डिपार्टेमेंट से NOC लेना अनिवार्य होता है। 

ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और कमर्शियल के लिए नियम

यदि दिल्ली में किसी जगह पर ग्रुप हाउसिंग सोसायटी या कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है, तो इसके लिए ऊंचाई निर्धारित नहीं है। हालांकि, इस तरह की बिल्डिंग के लिए फ्लोर एरिया रेश्यो कवरेज, फायर डिपार्टमेंट की एनओसी, एयरपोर्ट अथॉरिटी से एनओसी और भूकंप रोधी सिस्मिक जोन-4 के तहत इमारत का निर्माण करना अनिवार्य होता है। 

स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य

किसी भी नई इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक मान्यता प्राप्त स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भूकंप रोधी डिजाइन का प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है। वहीं, किसी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त मंजिल बनाने या मुख्य बीम/कॉलम/लोड-बेयरिंग दीवार को हटाने से पहले इंजीनियर की अनुमति और MCD की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है।

क्या है कहते हैं दमकल विभाग के नियम 

दिल्ली में15 मीटर से अधिक ऊंची रिहायशी इमारतों और 500 वर्ग मीटर से अधिक कवर्ड एरिया वाली व्यावसायिक इमारतों के लिए दिल्ली फायर सर्विस (DFS) से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।

दमकल की गाड़ियों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बिल्डिंग तक कम से कम 6 मीटर चौड़ा रास्ता होना चाहिए। साथ ही,बिल्डिंग में ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, होज रील, एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन पावर बैकअप और फायर लिफ्ट का होना अनिवार्य है।

निर्माण पूरा होने पर यह सर्टिफिकेट अनिवार्य

आपको बता दें कि बिना MCD या DDA द्वारा पास नक्शे के निर्माण करना पूरी तरह अवैध माना जाता है। वहीं, निर्माण पूरा होने पर नगर निगम से Occupancy Certificate और कंपलीशन सर्टिफिकेट लेना होता है। यह इस बात का प्रमाण है कि इमारत सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनी हुई है।

क्या है MCD एक्ट की धारा 348

यदि कोई इमारत जर्जर, असुरक्षित या गिरने की स्थिति में पाई जाती है, तो नगर निगम उसके मालिक को नोटिस जारी कर मरम्मत कराने या खतरे वाले हिस्से को हटाने या गिराने का निर्देश दे सकता है।

आपको बता दें कि केवल 40-50 साल पुराना होने के कारण इमारत गिराई नहीं जाती, बल्कि उसकी सुरक्षा का आकलन उसकी स्ट्रक्चरल मजबूती और देख-रेख के आधार पर होता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Sep 7, 2026, 14:50 IST

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