भारत के सभी राज्यों में क्यों नहीं है विधानपरिषद्, जानें वजह
भारत में केंद्र में जैसे संसद के दो सदन-लोकसभा और राज्यसभा होते हैं, वैसे ही राज्य में विधानसभा और विधानपरिषद् होती है। हालांकि, विधानपरिषद् के पास राज्यसभा जितनी शक्ति नहीं होती है।
यह बात आप जानते ही होंगे कि भारत में हमें राज्यों में विधानपरिषद् देखने को मिलती है। हालांकि, सभी राज्यों में विधानपरिषद् नहीं है। देश में केंद्र में जैसे संसद के दो सदन हैं- लोकसभा और राज्यसभा, वैसे ही राज्य में विधानसभा और विधानपरिषद् मौजूद है। हालांकि, विधानपरिषद् सभी राज्यसभा जितनी शक्तिशाली नहीं है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर किन राज्यों में विधानपरिषद् है और सभी राज्यों में यह क्यों मौजूद नहीं है?
कितने राज्यों में मौजूद है विधानपरिषद्
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत के कितने राज्यों में विधानपरिषद् मौजूद हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के मुताबिक, राज्यों को विधानपरिषद् बनाने या समाप्त करने का अधिकार दिया गया है। मौजूदा समय में भारत के कुल 6 राज्यों में विधानपरिषद् देखने को मिलती हैं, जो कि उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य हैं।
क्यों होती है विधानपरिषद्
राज्यों में विधानसभा होने के साथ-साथ विधानपरिषद् होने के प्रमुख कारण हैंः
जल्दबाजी में लिए गए फैसलों पर रोक
कई बार विधानसभा में राजनीतिक दबाव या अन्य कारणों की वजह से जल्दबाजी में कानून पास हो जाते हैं। ऐसे में विधानपरिषद् का इन कानूनों पर रोक लगाना है। यह एक ऊपरी सदन होता है, जो कि विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को दोबारा विचार करने और बहस कर इसे सुधारने का मौका देता है, जिससे कानून अधिक परिपक्व बनता है।
विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों का प्रतिनिधित्व
कई बार राजनीति और चुनाव से दूर रहने वाले बुद्धिजीवी जैसे कि वैज्ञानिक, डॉक्टर, शिक्षक और कलाकार प्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ने के लिए सहज नहीं होते हैं। ऐसे में उन्हें बिना चुनाव लड़े और राज्यपाल द्वारा मनोनित कर सरकार का हिस्सा बनाया जाता है, जिससे उनकी नीतियों का लाभ राज्यों को मिलता है।
बड़े राज्यों को संभालना
राज्यों की अधिक आबादी और क्षेत्रफल की वजह से कई बार समाज के हर वर्ग या अल्पसंख्यकों को विधानसभा में सीटें नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में विधानपरिषद् में अप्रत्यक्ष रूप से मनोनित होकर यह वर्ग नीति-निर्माण में अपना सहयोग देते हैं।
कैसे होता है विधानपरिषद का गठन?
विधानपरिषद् का गठन सीधे तौर पर नहीं होता है, बल्कि इसकी अलग प्रक्रिया है, जो कि इस प्रकार हैः
-इसमें 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों जैसे कि नगर निगम और जिला बोर्ड द्वारा चुने जाते हैं।
-1/3 सदस्यों का चुनाव विधानसभा के विधायक करते हैं।
-1/12 सदस्य राज्य के स्नातक चुनते हैं।
-1/12 सदस्यों का चुनाव न्यूनतम 3 वर्ष से पढ़ा रहे शिक्षकों द्वारा किया जाता है।
-1/6 सदस्यों का चुनाव राज्यपाल द्वारा कला, विज्ञान, साहित्य, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से किया जाता है।
सभी राज्यों में क्यों नहीं है विधानपरिषद्
अब हम यह जान लेते हैं कि सभी राज्यों में विधानपरिषद् क्यों नहीं है? दरअसल, संविधान के निर्माण के समय विधानपरिषद् को राज्यों की इच्छा पर छोड़ दिया गया है। क्योंकि, विधानपरिषद् का संचालन बहुत महंग पड़ता है, जिससे छोटे राज्यों पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ सकता है। वहीं, विधानपरिषद् के पास राज्यसभा के मुकाबले बहुत सीमित शक्तियां होती हैं।
यह किसी भी साधारण बिल को अधिकतम 4 महीने ही रोक सकती है। इसमें पहली बार किसी बिल को 3 महीने और दूसरी बार वापस आने पर सिर्फ एक महीने ही रोका जा सकता है, जबकि धन विधेयक को सिर्फ 14 दिन ही रोका जा सकता है। दूसरी तरफ, कुछ आलोचक यह भी मानते हैं कि जिन लोगों को सीधे चुनाव जीतकर इंट्री नहीं मिल पाती है, वे अक्सर इस दरवाजे से इंट्री कर लेते हैं। इन सभी कारणों की वजह से हर राज्य में विधानपरिषद् देखने को नहीं मिलती है।
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