उत्तर प्रदेश का सबसे ऊंचा बांध कौन-सा है, जानें नाम और स्थान
उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां विभिन्न नदियों का प्रवाह होता है, जिस पर बड़े-बड़े बांध बने हुए हैं। इस कड़ी में हम यूपी के सबसे ऊंचे बांध के बारे में जानेंगे।
उत्तर प्रदेश देश का विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं वाला राज्य है, जो कि अपने समृद्ध इतिहास और विरासत के लिए जाना जाता है। इस कड़ी में यहां कई प्रमुख नदियों का प्रवाह होता है, जिन पर कई बड़े और प्रमुख बांध बने हुए हैं। यूपी की विभिन्न परीक्षाओं में बांधों के बारे में अक्सर सवाल पूछे जाते हैं। इस लेख में हम यूपी के सबसे ऊंचे बांध के बारे में जानेंगे, जिसे लेकर UPPSC समेत यूपी कृषि विभाग में भी सवाल पूछे गए हैं।
यूपी का सबसे ऊंचा बांध
अब हम यूपी के सबसे ऊंचे बांध के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि यूपी का सबसे ऊंचा बांध रामगंगा बांध है, जिसे कालागढ़ नाम से भी जाना जाता है। यह बांध न सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए, बल्कि उत्तराखंड के लिए भी बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। बांध यूपी के बिजनौर जिले में स्थित है। अक्सर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर प्रदेश के सबसे ऊंचे बांध के बारे में पूछा जाता है, तो आधिकारिक उत्तर रामगंगा बांध ही है।
कितना ऊंचा है रामगंगा बांध
रामगंगा बांध अपनी ऊंचाई के लिए जाना जाता है। इसकी ऊंचाई 128 मीटर यानि कि 420 फीट है। इतनी अधिक ऊंचाई होने के कारण इसे सबसे ऊंचा बांध होने का दर्जा प्राप्त है।
कितना लंबा है बांध
रामगंगा बांध कुल 630 मीटर लंबा है। इसके प्रकार की बात करें, तो यह मिट्टी और चट्टानों के भराव वाल बांध है। बांध को बनाने में कंक्रीट के बजाय प्राकृतिक मिट्टी और पत्थरों का उपयोग किया गया है।
बांध की क्या है भौगोलिक स्थिति
बांध की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी समझना जरूरी है, क्योंकि कई बार परीक्षाओं में इसकी सही लोकेशन के बारे में पूछ लिया जाता है। यह बांध मुख्य रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कालागढ़ नामक स्थान पर है। वहीं, यूपी से उत्तराखंड अलग होने के बाद इस परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में किया गया था। इस बांध के पानी का सबसे बड़ा हिस्सा, नहर और सिंचाई नेटवर्क यूपी के पश्चिमी और मध्य जिलों में है, जिसमें बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, यूपी में इसकी लोकेशन बिजनौर ही है।
क्या है बांध का इतिहास
रामगंगा बांध के इतिहास की बात करें, तो इसका निर्माण कार्य 1961-62 में शुरू हुआ था, जो कि 1974 में बनकर तैयार हुआ।
Ramganga Dam का महत्त्व
रामगंगा बांध का निर्माण बहुउद्देश्य से किया गया है, जो कि इस प्रकार हैः
-बांध के पीछे जमा होने वाले पानी को यूपी के मैदानी इलाकों में सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता है। बिजनौर में हरेवली बैराज मौजूद है, जिससे यह पानी यूपी की नहरों में भेजा जाता है।
-बांध के नीचे एक पावर हाउस भी बनाया गया है, जिससे बिजली उत्पादन किया जाता है। इस बिजली की आपूर्ति विभिन्न जिलों में की जाती है।
-मानसून में अक्सर रामगंगा नदी का पानी बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में यह बांध बाढ़ को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, इस बांध के पास जिम कार्बेट नेशनल पार्क भी है, जिससे यह वन्यजीवों के लिए उपयोगी है।
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