संसद की लोक लेखा समिति क्या होती है और कौन होता है इसका अध्यक्ष, पढ़ें
यदि आप भारतीय राजव्यवस्था के बारे में पढ़ेंगे, तो आपको संसद की लोक लेखा समिति के बारे में जरूर पढ़ने को मिलेगा। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण समिति होती है। इस लेख में हम इस समिति के बारे में विस्तार से जानेंगे।
लोक लेखा समिति संसद की सबसे महत्त्वपूर्ण और पुरानी वित्तीय समितियों में से एक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के पैसे के हिसाब रखने और कार्यपालिका की वित्तीय जवाबदेही तय करने में इसकी भूमिका रहती है। आपको बता दें कि इसे संसद का ‘चौकीदार’ भी कहा जाता है, जो कि वित्तीय लेनदेन पर नजर रखने का काम करती है।
लोक लेखा समिति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
लोक लेखा समिति भारत की सबसे पुरानी संसदीय समितियों में से एक है, जिसका गठन 1921 में हुआ था। समिति की स्थापना भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रावधानों के तहत की गई थी। देश आजाद होने के बाद भारतीय संविधान लागू हुआ और यह शक्तिशाली और स्वायत्त बन गई।
कैसे हुआ समिति का गठन
लोक लेखा समिति एक द्विसदनीय समिति होती है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है।
-इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं।
-इन 22 सदस्यों में 15 सदस्य लोकसभा और 7 सदस्य राज्यसभा से होते हैं।
-समिति के सदस्यों का चुनाव 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' और 'एकल संक्रमणीय मत पद्धति' के माध्यम से किया जाता है। इसमें सदस्य का कार्यकाल 1 वर्ष का होता है।
-कार्यपालिका के किसी भी मंत्री को समिति का सदस्य नहीं चुना जाता है। यदि कई सदस्य मंत्री बन जाता है, तो उसकी सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती है।
अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर है यह परंपरा
समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा के अध्यक्ष करते हैं। हालांकि, शुरुआत में सत्ताधारी दल का नेता ही समिति का अध्यक्ष होता था, लेकिन 1967 में एक नई परंपरा शुरू हुई। इस परंपरा के तहत अब विपक्ष के किसी वरिष्ठ नेता को समिति का अध्यक्ष बनाया जाता है, जिससे सरकार के खर्चों की जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो सके।
लोक लेखा समिति के मुख्य कार्य और शक्तियां
-लोक लेख समिति यह सुनिश्चित करती है कि संसद ने जो धन सरकार को दिया है, वह धन उसी मद में खर्च हुआ है या नहीं, जिसके लिए धन को स्वीकृत किया गया था।
-भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, जो राष्ट्रपति को सौंपी जाती है, उसकी जांच भी यह समिति करती है। यही वजह है कि कैग को लोक लेखा समिति का मित्र भी कहा जाता है।
-यह समिति इस बात की जांच करती है कि सरकारी धन का कहीं भी दुरुपयोग या अकुशल प्रबंधन हुआ है या नहीं हुआ है।
-यह समिति इस बात पर गौर करती है कि जो धन खर्च हुआ है, वह सिर्फ कागजात के आधार पर नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक से खर्च किया गया है या फिर नहीं।
समिति की हैं अपनी सीमाएं
समिति जहां एक तरफ शक्तिशाली है, तो दूसरी तरफ इसकी अपनी सीमाएं हैं।
-समिति सिर्फ अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है। इसके पास सरकार को सीधे तौर पर आदेश जारी करने का अधिकार नहीं होता है।
-यह समिति धन खर्च होने के बाद जांच करती है, ऐसे में यह भविष्य के खर्चों पर रोक नहीं लगा सकती है।
-यह समिति सिर्फ नीति के क्रियान्वयन में हुए खर्चों का ऑडिट करती है।
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