इजरायली संसद (Knesset) ने बुधवार को Narendra Modi को “स्पीकर ऑफ द कनेसेट मेडल” से सम्मानित किया। यह कनेसेट का सर्वोच्च सम्मान है, जो उन्हें भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने में उनके विशेष नेतृत्व के लिए दिया गया।
ऐतिहासिक भाषण और सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान कनेसेट में उनके संबोधन के बाद प्रदान किया गया। उनके भाषण के दौरान उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन मिला और जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने सांसदों से मुलाकात की, जहां सांसदों ने उनके साथ तस्वीरें और सेल्फी लीं।
भारत-इजरायल संबंधों की गहराई
अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि भारत में इजरायल की दृढ़ता, साहस और उपलब्धियों के प्रति गहरा सम्मान है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के संबंध दो हजार साल से भी अधिक पुराने हैं, जिनका उल्लेख Book of Esther और Talmud जैसे ग्रंथों में मिलता है।
यहूदी समुदाय और भारत का संबंध
मोदी ने कहा कि प्राचीन समय में यहूदी व्यापारी भारत आए और यहां उन्हें सम्मान और अवसर मिला। भारत में यहूदी समुदाय ने बिना किसी भेदभाव के अपने धर्म और संस्कृति को सुरक्षित रखा और समाज का हिस्सा बनकर रहे, जो भारत के लिए गर्व की बात है।
सांस्कृतिक और जन-जन के रिश्ते
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-इजरायल संबंधों का आधार दोनों देशों के लोगों के बीच जुड़ाव है। उन्होंने इजरायल में योग और आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया और युवाओं को भारत आने का निमंत्रण दिया। साथ ही उन्होंने भारतीय संसद में इजरायल के लिए बनाए गए फ्रेंडशिप ग्रुप का उल्लेख करते हुए सांसदों के बीच और अधिक आदान-प्रदान की उम्मीद जताई।
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