Economy में क्यों जरूरी है Repo Rate, जानें कारण

Last Updated: Feb 18, 2026, 19:05 IST

रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(RBI) द्वारा भारतीय बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बाजार में स्थिरता और विकास को बनाए रखने के लिए रेपो रेट का अधिक महत्त्व है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।

रेपो रेट क्या होता है
रेपो रेट क्या होता है

भारतीय अर्थव्यवस्था में हम विभिन्न प्रकार के तकनीकी शब्दों के बारे में सुनते और पढ़ते हैं। इस कड़ी में Repo Rate भी शामिल है। यह वह दर होती है, जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(RBI) द्वारा भारतीय बैंकों को कर्ज दिया जाता है। 

इसे आप एक प्रकार का पावर स्विच भी कह सकते हैं, जिसकी कमान रिजर्व बैंक के हाथ में होती है। बाजार में महंगाई बढ़ने, नगद तरलता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देन के लिए रेपो रेट का अधिक महत्त्व है। इस लेख में हम इस बारे में जानेंगे। 

Economy में क्यों जरूरी है Repo Rate ?

भारतीय अर्थव्यवस्था में रेपो रेट का अधिक महत्त्व है, जिसे हमने अलग-अलग खंडों में समझाया है, जो कि इस प्रकार है

-महंगाई को काबू करने में उपयोगी

यदि बाजार में वस्तु या सेवाओं का दाम अधिक बढ़ता है, तो रेपो रेट में बढ़ोतर की जाती है। इससे बैंकों को रिजर्व बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है, जिसका असर बैंकों के ग्राहकों पर भी बढ़ता है। क्योंकि, बैंक द्वारा आम जनता के लिए भी कर्ज की दर को बढ़ा दिया जाता है। अब इससे होता क्या है, तो आपको बता दें कि जब कर्ज महंगा होगा, तो लोग खर्च कम करेंगे और कर्ज नहीं लेंगे। इसका सीधा असर बाजार में पड़ेगा, जिससे मांग में कमी आएगी और कीमतें स्थिर हो जाती हैं।

-तरलता में उपयोगी

बाजार में कितना कैश होगा, यह रेपो रेट द्वारा ही तय हो पाता है। रेपो रेट कम होने से अर्थव्यवस्था में पैसा बढ़ जाता है, जिससे खर्च भी बढ़ जाते हैं। वहीं, यदि रेपो रेट अधिक होगा, तो लोग खर्च भी कम करेंगे और बाजार में अतिरिक्त पैसा नहीं होगा।

-आर्थिक विकास को गति देने में उपयोगी

जब अर्थव्यवस्था सुस्त चल रही होती है, तो मंदी का अधिक खतरा रहता है। इससे रेपो रेट को कम कर बाजार को उठाया जाता है। रेपो रेट कम होने से कंपनियां नई तकनीक और मशीनों में निवेश करती हैं, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं और लोगों को रोजगार मिलने से देश के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ावा मिलता है।

निवेश पर भी पड़ता है प्रभाव 

रेपो रेट कम या अधिक होने का असर निवेश पर भी पड़ता है। यदि रेपो रेट संतुलित बनी रहती है, तो विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में निवेश किया जाता है। इससे भारतीय रुपया मजबूत होता है। वहीं, यदि रेपो रेट संतुलित नहीं रहेगा, तो भारत में विदेशी निवेश नहीं होगा, जिससे रुपये की स्थिति पर असर पड़ेगा। आपको बता दें कि विदेश व्यापार के लिए रुपये का मजबूत होना बहुत जरूरी है। हम जितना निर्यात करेंगे, उतना ही रुपया मजबूत होगा। यदि हम आयात अधिक करेंगे, तो रुपया कमजोर होगा। 

रेपो रेट का प्रभाव

यहां हम टेबल के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं कि महंगाई बढ़ने पर रेपो रेट बढ़ाया जाता है, जिससे लोन महंगा होता है और खर्चे कम हो जाते हैं। वहीं, बाजार सुस्त होने पर इसे कम किया जाता है, जिसके बारे में टेबल में जानकारी दी गई हैः

स्थिति

रेपो रेट

प्रभाव

महंगाई अधिक है

रेपो रेट बढ़ाया जाएगा

ईएमआई महंगी, बचत अधिक होगी, खर्चे कम

बाजार सुस्त है

रेपो रेट को कम किया जाएगा

लोन सस्ता होगा, बाजार में कैश फ्लो बढ़ेगा, लोग अधिक खर्च करेंगे, मांग बढ़ेगी

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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