भारत का इकलौता जिला, जो कभी नहीं हुआ अंग्रेजों का गुलाम, पूर्वी राजस्थान का है प्रवेश द्वार
भारत में अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक राज किया, लेकिन इनमें से एक एक जिला ऐसा भी है, जो कि कभी अंंग्रेजों का गुलाम नहीं रहा। यह जिला अपने यहां मौजूद एक प्रसिद्ध किले के लिए जाना जाता है।
भारत में अंग्रेजों ने अपनी हुकूमत को 200 सालों तक बनाए रखा। इस कड़ी में उन्होंने पूरे देश में शासन किया। हालांकि, राजस्थान का भरतपुर जिला ऐसा है, जिसे अंग्रेज नहीं जीत सके। यहां मौजूद एक प्रसिद्ध किला अंग्रेजों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया था, जिसे जीतने के लिए अंग्रेजों ने कई बार कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
लोहागढ़ के लिए जाना जाता है जिला
राजस्थान के भरतपुर जिले में लोहागढ़ किला है, जिसका निर्माण महाराजा सूरजमल ने 1733 ईस्वी में किया था। इस किले को ‘अजेयगढ़ किले’ के नाम से भी जाना जाता है।
किले के बाहर बनाई गई थी मिट्टी की दीवार
इस किले को लेकर एक खास बात यह थी कि किले के बाहर एक मिट्टी की दीवार बनाई गई थी। ऐसे में जब भी दुश्मन द्वारा तोप से गोले दागे जाते थे, तो वे मिट्टी की दीवार में धंस जाते थे। इससे किले की मुख्य दीवार को नुकसान नहीं पहुंचता था। वहीं, किले के आगे एक गहरी खाई बनाई गई थी, जिसमें मगरमच्छों को छोड़ दिया जाता था। ऐसे में कोई भी दुश्मन तैरकर किले की दीवार तक प्रवेश नहीं कर सकता था।
1805 में हुई लॉर्ड लेक की हार
इस किले पर कब्जा करने के लिए 1805 में लॉर्ड लेक आगे बढ़े और लगातार 5 बार हमले किये। ब्रिटिश सेना ने तोपों से लगातार गोलाबारी की, लेकिन वे मिट्टी की दीवार की वजह से असफल रहे। ऐसे में अंत में अंग्रेजों ने हार मान ली और उन्हें पीछे हटना पड़ा।
‘पूर्वी राजस्थान का प्रवेश द्वार’ है भरतपुर
भरतपुर शहर की स्थापना महाराजा सूरजमल ने 1733 में की थी। इसकी लोकेशन की वजह से इसे ‘पूर्वी राजस्थान का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि यह जाट राजवंश की राजधानी रहा है, जिन्होंने मुगलों और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी। इस जिले में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल केवलादेव नेशनल पार्क भी है, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस पार्क में हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पक्षी पहुंचते हैं।
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