दुनिया में जितना महत्त्व नदियों का है, उतना ही महत्त्व झीलों का भी है। ये न सिर्फ पानी के स्रोत के रूप में जानी जाती हैं, बल्कि पारिस्थितिकी रूप से भी इनका अधिक महत्त्व है। वहीं, झीलों के आसपास जैव विविधता को भी बल मिलता है, जिससे विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु इसे अपने प्राकृतिक आवास के रूप में चुनते हैं। आपने दुनिया की अलग-अलग झीलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे ऊंची झील कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
दुनिया की सबसे ऊंची झील कौन-सी है
दुनिया की सबसे ऊंची झील टिटिकाका झील(Lake Titicaca) है। भौगोलिक रूप से यह दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण झीलों में से एक है। इस झील को लेकर खास बात यह है कि यह इकलौती झील है, जहां अधिक ऊंचाई होने के बावजूद भी बड़े जहाज और नावें चल सकती हैं।
कहां है टिटिकाका झील
टिटिकाका झील दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के एंडीज पर्वतमाला पर है। इस झील से दो देशों की सीमा साझा होती है, जो कि पेरू और बोलीविया है। झील का 60 फीसदी हिस्सा पेरू में है, तो 40 फीसदी हिस्सा बोलीविया में है।
कितनी ऊंचाई पर है झील
यह झील समुद्र तल से 3,812 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वहीं, इसका कुल एरिया 8,372 वर्ग किलोमीटर में है, जो कि अमेरिका के लिए ताजे पानी का एक बड़ा स्रोत है।
क्या होता है टिटिकाका का अर्थ
स्थानीय आयमारा भाषा में ‘टिटि’ का अर्थ एक जंगली बिल्ली से है, जबकि ‘काका’ का अर्थ चट्टान से है। इस झील को लेकर कहा जाता है इस झील का आकार एक बिल्ली जैसा दिखता है।
टिटिकाका का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व
टिटिकाकाल झील की गहराइयों में वैज्ञानिकों को एक धार्मिक स्थल के अवशेष मिले हैं, जो कि करीब 1500 वर्ष पुराने बताए जाते हैं। वहीं, पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस झील का संबंध सूर्य से है, जिसके बाद इंका साम्राज्य की स्थापना बताई जाती है। ऐसे में स्थानीय लोगों में झील को लेकर गहरी आस्था है।
झील की मुख्य विशेषताएं क्या हैं
-यह झील 284 मीटर गहरी है, जो कि वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का क्षेत्र है।
-झील में एक टिटिकाका फ्राग पाए जाते हैं, जो कि सिर्फ इसी झील में मिलते हैं।
-झील के आसपास का वातावरण शुष्क और ठंडा है।
-यह एक ताजे पानी की झील है, जिससे पानी के स्रोत के रूप में अमेरिका में इसका अधिक महत्त्व है।
उरोस जनजाति के तैरते द्वीप हैं प्रसिद्ध
आपको बता दें कि इस झील में उरोस जनजाति के तैरते द्वीप प्रसिद्ध हैं। यह द्वीप टोटोरा नामक सूखी घास से बनाए जाते हैं। इनके माध्यम से नाव, द्वीप और घर तक का निर्माण किया जाता है। पानी की वजह से जब यह घास सड़ जाती है, तो नई घास से निर्माण किया जाता है। यह एक तरह की परंपरा है, जो कि सदियों से यहां चली आ रही है।
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