एशिया की सबसे ऊंची राजधानी, जिसका दुनिया में आता है तीसरा स्थान
एशिया में कुल 48 देश हैं, जिनकी अपनी-अपनी राजधानी हैं। हालांकि, इनमें एक राजधानी ऐसी भी है, जिसे एशिया की सबसे ऊंची राजधानी होने का दर्जा प्राप्त है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
एशिया में कुल 48 देश हैं, जिनकी अपनी-अपनी राजधानियां हैं। इनमें कुछ देशों में हमें ऊंची-ऊंची चोटियां देखने को मिलती हैं। इस कड़ी में यहां एक ऐसी राजधानी भी है, जिसकी पहचान एशिया की सबसे ऊंची राजधानी के रूप में होती है। कौन-सी है यह राजधानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
एशिया की सबसे ऊंची राजधानी
एशिया की सबसे ऊंची राजधानी थिम्फू है, जो कि भूटान देश की राजधानी है। यह पहाड़ों की गोद में बसी हुई सबसे खूबसूरत राजधानियों में से एक में गिनी जाती है।
कितनी ऊंचाई पर है राजधानी
हिमालय की वादियों में बसी थिम्फू समुद्र तल से लगभग 2,320 से 2,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आपको बता दें कि इतनी ऊंचाई के साथ यह शहर एशिया की सबसे ऊंची और दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची राजधानी भी है।
थिम्फू की मुख्य विशेषताएं
थिम्फू भूटान के पश्चिमी-मध्य भाग में 'रैडक' या वांग चू नदी की घाटी में बसा हुआ है। इस शहर की खास बात यह है कि यह दुनिया की इकलौती राजधानी है, जिसमें ट्रैफिक लाइट नहीं है। यहां सड़कों पर ट्रैफिक संभालने के लिए विशेष कपड़ों में पुलिसकर्मी खड़े होते हैं, जो अपने हाथों के इशारों से गाड़ियों को नियंत्रित करते हैं। वहीं, थिम्फू देश का प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र होने के साथ-साथ भूटान की 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' (Gross National Happiness) की जीवन शैली का मुख्य उदाहरण है। यहां आधुनिकता के साथ-साथ प्रकृति और बौद्ध परंपराओं का बैलेंस रहता है।
थिम्फू के प्रमुख स्थल
थिम्फू के प्रमुख स्थलों में ताशिचो डजोंग है, जो कि वांग चू नदी के किनारे बना किला है। यह भूटान सरकार और धर्म का मुख्य केंद्र है, जहां राजा का ऑफिस, मंत्रियों के दफ्तर और बौद्ध भिक्षुओं का निवास स्थान है।
-इसके अलावा, यहां बुद्ध डोर्डेनमा है, जो कि थिम्फू की पहाड़ियों पर स्थित भगवान बुद्ध की 169 फीट ऊंची कांसे की विशाल प्रतिमा है। इसके अंदर 1 लाख से अधिक छोटी बुद्ध प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
-थिम्फू शहर के केंद्र में नेशनल मेमोरियल चोर्टेन है, जो कि एक स्तूप है। यह स्थानीय लोगों के लिए दैनिक प्रार्थना और ध्यान का प्रमुख स्थान है।
-थिम्फू में मोटिथांग ताकिन प्रिजर्व नामक स्थान भी है, जो कि भूटान के राष्ट्रीय पशु 'ताकिन' का संरक्षण केंद्र है। यह दिखने में आधा बकरी और आधा गाय जैसा लगता है।
थिम्फू में इमारतों को लेकर हैं सख्त नियम
आपको बता दें कि थिम्फू में इमारतों के निर्माण को लेकर सख्त नियम हैं। यहां पर बहुमंजिला कंक्रीट की गगनचुंबी इमारतें बनाने पर प्रतिबंध है। शहर की हर नई या पुरानी इमारत में पारंपरिक भूटानी वास्तुकला देखने को मिलेगी। इसके तहत लकड़ी की नक्काशीदार खिड़कियां, ढलवां छतें और दीवारों पर बने पारंपरिक चित्र का होना अनिवार्य किया गया है।
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