‘बाढ़ सब ले गई, पर मेरा सपना नहीं!' जानिए सत्येंद्र प्रताप सिंह के UPPSC क्रैक करने की अटूट दास्तान
कहते हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से हर परिस्थिति को बदला जा सकता है, बशर्ते मन में जीतने का हौसला हो। उत्तर प्रदेश के रहने वाले सत्येंद्र प्रताप सिंह की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने UPPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 1 रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियां कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आतीं। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सत्येंद्र ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थात् कोई भी काम केवल इच्छा करने या सोचने से पूरा नहीं होता, उसके लिए कठिन परिश्रम (उद्यम) करना पड़ता है। ठीक वैसे ही, जैसे सोते हुए शेर के मुँह में हिरण खुद-ब-खुद प्रवेश नहीं करता, बल्कि शिकार के लिए उसे भी मेहनत करनी पड़ती है।
यह कहानी है उत्तर प्रदेश के रहने वाले सत्येंद्र प्रताप सिंह की, जो ऐसी स्थिति में अफसर बनें, जहां अच्छे-अच्छों की हिम्मत टूटकर बिखर जाती है। मसलन जहां वह रहते हैं, वहां हर साल बाढ़ आती है और फसलें नष्ट हो जाती है। घर पानी में डूब जाता है और इससे खाने तक की दिक्कत होती है। अक्सर ऐसा होता था कि घर में कई-कई दिन तक खाना बनाने और खाने में परेशानी रहती थी। परिवार की माली हालत सुधारने के लिए सत्येंद्र ने कर्ज लेकर तरबूज और खरबूजे की खेती शुरू की थी लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। लॉकडाउन लगने से पूरी फसल बर्बाद हो गई थी।
यूपीएससी परीक्षा में भी फेल हो चुके थे। आज UPPSC सिविल सेवा परीक्षा में 1 रैंक हासिल कर सत्येंद्र ने यह साबित कर दिया कि कुछ भी नामुमकिन नहीं है। बस मन में जीत का हौंसला और गलती से सीखकर आगे बढ़ने का जज्बा चाहिए। आइए, सत्येंद्र प्रताप सिंह की इस प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी के बारे में जानते हैं।
उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं सत्येंद्र
सत्येंद्र प्रताप सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के घाघरा तराई क्षेत्र के एक छोटे से गांव में हुआ। वह एक बेहद साधारण परिवार से आती है, जहां हमेशा पैसों की तंगी बनी रही। पिता के खराब स्वास्थ्य और कर्ज के बोझ 2020 में परिवार की माली हालत सुधारने के लिए सत्येंद्र ने कर्ज लेकर तरबूज और खरबूजे की खेती शुरू की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकें।
सत्येंद्र की मां ने पढ़ाई के लिए काफी मोटिवेट
सत्येंद्र के बड़े भाई ने उत्तराखंड जाकर छोटी नौकरी शुरू कर दी। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद सत्येंद्र की मां ने उन्हें पढ़ाई के काफी मोटिवेट किया और आज जिसका रिजल्ट हम सभी के सामने हैं, उन्होंने साल 2024 में यूपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहली रैंक हासिल की और ऑफिसर बन परिवार और देश के लिए मिसाल कायम की। बेटी के ऑफिसर बनने से माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू है।
UPPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में हासिल की 1 रैंक
सत्येंद्र प्रताप सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। संसाधनों के अभाव और जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन बीटेक के बजाय बीए प्रोग्राम से पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद सत्येंद्र सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई। हालांकि उनका UPPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 1 रैंक हासिल करना इतना आसान नहीं था। सत्येंद्र ने पहले UPSC की परीक्षा दी लेकिन यूपीएससी में असफलता के बाद उन्होंने PSC की राह चुनी। 2023 में मेंस परीक्षा में 100 नंबर से फेल होने पर वे काफी टूट गए थे। तब उनकी मां ने उन्हें हौसला दिया।
Farhan Khan is an education journalist with over 3 years of experience specializing in the public sector recruitment space. From UPSC and SSC to Banking and Defense, he provides end-to-end coverage on exam notifications, admit cards, and Sarkari results. Farhan holds a Master’s degree in Mass Communication from Guru Jambheshwar University and blends research-driven journalism with creative storytelling to guide aspirants through their exam preparation journeys.