भारत के अलावा नेपाल से लगती है इस देश की सीमा, जानें
नेपाल पूरी तरह से लैंडलॉक्ड देश है, यानि यह चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ है। यह सिर्फ 2 देशों के साथ साझा करता है, जिसमें एक भारत भी है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर नेपाल, भारत के अलावा किस देश के साथ अपनी सीमा साझा करता है।
नेपाल भारत का महत्त्वपूर्ण पड़ोसी देश है। यह लैंडलॉक्ड देश है, यानि यह चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ है। यह सिर्फ 2 देशों के साथ साझा करता है, जिसमें एक भारत भी है। हालांकि, इसके अलावा एक देश और है, जिससे नेपाल अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत के साथ कितनी है नेपाल की सीमा
नेपाल अपनी तीन दिशाओं यानि कि दक्षिण, पूर्व और पश्चिमी दिशा से भारत से घिरा हुआ है। भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है।
नेपाल से सीमा साझा करने वाले भारतीय राज्य
नेपाल से सीमा सीमा साझा करने वाले 5 भारतीय राज्य हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
बिहारः नेपाल के साथ सबसे लंबी सीमा बिहार राज्य की लगती है, जो कि करीब 726 किमी सीमा साझा करता है। बिहार का पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिला नेपाल से अपनी सीमा साझा करते हैं।
उत्तर प्रदेश: यूपी लगभग 551 किमी लंबी सीमा नेपाल के साथ साझा करता है। यूपी का महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत शामिल है।
उत्तराखंड: यह राज्य पश्चिम में काली नदी के सहारे नेपाल से अलग होता है।
पश्चिम बंगाल: पूर्व में दार्जिलिंग के रास्ते नेपाल से सीमा बनाता है।
सिक्किम: पूर्व में कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला के पास नेपाल के साथ सबसे छोटी करीब 99 किमी की सीमा साझा करता है।
आपको बता दें कि 1950 की 'शांति और मित्रता संधि' के कारण दोनों देशों के बीच सीमा खुली है। यहां से नागरिकों को आवाजाही के लिए पासपोर्ट या वीजा की आवश्यकता नहीं होती।
चीन से लगती है सीमा
नेपाल अपनी उत्तरी दिशा में पूरी तरह से चीनके साथ सीमा साझा करता है। दोनों देशों के बीच लगभग 1,389 किलोमीटर लंबी सीमा है। यह सीमा पूरी तरह से महान हिमालय पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। आपको बता दें कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी यानि 'माउंट एवरेस्ट' ठीक भारत-चीन-नेपाल के इस एरिया में नेपाल और चीन (तिब्बत) की सीमा पर ही स्थित है।
सीमा के पास के प्रमुख दर्रें
आपको बता दें कि कठिन रास्तों और बर्फीले पहाड़ों के कारण यहां सीमित व्यापारिक मार्ग हैं, जिनमें तातोपानी-झांगमू और रासुवागढ़ी-कैरोंग मुख्य क्रॉसिंग बार्डर है।
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