उत्तर प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है, जो कि विभिन्न कृषि उत्पादों की गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इस कड़ी में यहां मौजूद गाजीपुर जिला, वह जिला है, जो कि अपने गोल काली मिर्च के लिए प्रसिद्ध है।
यहां की काली मिर्च अपने तीखेपन के लिए विख्यात है। दूर से देखने पर यह मिर्च काले मोतियों की तरह लगती है, लेकिन असल में इसका स्वाद ऐसा है कि खाने वाला पानी मांग ले। इस लेख में हम गाजीपुर की गोल काली मिर्च से जुड़ी अन्य विशेषताओं के बारे में जानेंगे।
क्या है अधिक तीखेपन का कारण
गोल काली मिर्च का तीखापन कैप्साइसिन तत्व है। यह तत्त्व इसके बीज और गूदे में अधिक पाया जाता है, जिससे यह मिर्च अधिक तीखी हो जाती है। इसका Scoville Heat Unit 30,000 से ऊपर होता है, ऐसे में यह स्वाद में बहुत तीखी होती है और खाना बनाने में इसका उपयोग बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है।
इन नामों से जानी जाती है मिर्च
उत्तर प्रदेश में स्थानीय स्तर पर इसे अलग-अलग नामोंं से जाना जाता है। कुछ लोग इसे Black round Pearl, Dark round green chilli और गोल काली मिर्च के नाम से पुकारते हैं। गाजीपुर की इस मिर्च को प्रदेश के अन्य जिलों में भी भेजा जाता है।
इस क्षेत्र की मिर्च पहले से है प्रसिद्ध
आपको बता दें कि गाजीपुर में मोहम्मदाबाद और भांवरकोल की मिर्च पहले ही प्रसिद्ध है। यहां की मिर्चों को बंगाल-बिहार के अलावा दुबई तक भेजा जाता है। क्योंकि, इन क्षेत्रों की मिर्च अपने तीखेपन के स्वाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
गाजीपुर का इतिहास
गाजीपुर के इतिहास को लेकर कहा जाता है कि 1330 में दिल्ली के सुल्तान रहे मोहम्मद बिन तुगलक के शासन में सैयद मसूद गाजी ने इस शहर की स्थापना की थी। उनके नाम पर ही इस शहर का नाम गाजीपुर रखा गया है।
मुगलकाल में भी यह शहर व्यापारिक और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण रहा है। साल 1820 में अंग्रेजों ने यहां दुनिया की सबसे बड़ी अफीम फैक्ट्री स्थापित की थी। गंगा किनारे बसे होने और अपने सांस्कृतिक महत्त्व की वजह से गाजीपुर को यूपी की छोटी काशी भी कहा जाता है।
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