उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। भारत का यह राज्य देश के कुल 7.33 फीसदी हिस्से में फैला हुआ है, जो कि अपनी विविध संस्कृति और ऐतिहासिक व अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है।
राज्य में कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। ये सभी मंडल कुल चार संभागों में बंटे हुए हैं, जिनमें पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और बुंदेलखंड शामिल है। इन संभागों में हमें अलग-अलग लोकनृत्य भी देखने को मिलते हैं। क्या आप यूपी के सभी लोकनृत्यों के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
बुंदेलखंड क्षेत्र के लोकनृत्य
राई नृत्य
यह बेड़िया समुदाय की महिलाओं द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर किया जाता है। इसे मोर नृत्य भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें नृतकों की गति मोर जैसी होती है।
सौरा नृत्य
किसान जब अपनी फसल काट लेते हैं, तो इस खुशी को जाहिर करने के लिए यह नृत्य किया जाता है। इस नृत्य में डंडों का प्रयोग होता है।
दीवारी नृत्य
यह नृत्य मुख्य रूप से अहीर समुदाय द्वारा किया जाता है, जिसमें मोर के पंखों से सजी लाठियों के साथ युद्ध की मुद्राएं बनाई जाती हैं।
धुरिया नृत्य
इस नृत्य में कुम्हार समुदाय के पुरुष स्त्री का वेश धारण कर नृत्य करते हैं।
घोड़ा नृत्य
इसमें शुभ अवसरों पर घोड़ों को बाजों की धुन पर नचाया जाता है। पश्चिमी यूपी में भी इस तरह के नृत्य देखने को मिल जाते हैं।
पूर्वांचल क्षेत्र के लोकनृत्य
कजरी
कजरी नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा सावन आने की खुशी में किया जाता है।
कठघोड़वा
इस नृत्य में शुभ अवसरों पर एक व्यक्ति लकड़ी के घोड़े के अंदर रहकर नृत्य करता है। यह शादी-ब्याह में खूब पसंद किया जाता है।
नटवरी
यह नृत्य अहीर समुदाय द्वारा होली व अन्य त्योहारों पर किया जाता है, जिसमें संगीत की धुनों पर थिरका जाता है।
धोबिया नृत्य
यह नृत्य धोबी समुदाय में विवाह या फिर संतान के जन्म के अवसर पर किया जाता है। नृत्य में गधे और मालिक का हास्य नाट्य रूपांतर दिखाया जाता है।
ब्रज व अन्य क्षेत्र
मयूर नृत्य
इस नृत्य में नृतक मोर के पंख वाली वेशभूषा पहनकर राधा-कृष्ण के प्रेम-प्रसंगों को दर्शाते हुए नृत्य करते हैं।
छपेली
इस नृत्य में एक हाथ में शीशा और दूसरे हाथ में रूमाल होता है।
पासी नृत्य
यह नृत्य मुख्य रूप से पासी समुदाय द्वारा अपनी वीरता को दिखाने के लिए किया जाता है।
ढिमरयाई
यह मुख्य रूप से ढीमर जाति द्वारा किया जाता है, जो कि शुभ अवसरों पर होता है।
चरकुला
इस नृत्य में महिलाएं अपने सिर पर रथ के चक्र रखकर उसके ऊपर दीये जलाकर नृत्य करती हैं। यह ब्रज का मुख्य नृत्य है।
रासलीला
रासलीला भगवान श्रीकृष्ण की लीलीओं पर आधारित होता है।
नौटंकी
नौटंकी में गायन के साथ-साथ नृत्य भी होता है, जो कि ब्रज क्षेत्र में खूब पसंद किया जाता है।
खयाल
खयाल नृत्य को विशेष रूप से बुंदेलखंड में पुत्र के जन्म होने पर किया जाता है।
करमा
यह सोनभद्र और मिर्जापुर में खरवार जनजाति द्वारा किया जाता है।
कत्थक
यह उत्तर प्रदेश का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है।
जोगिनी
जोगिनी अवध क्षेत्र का नृत्य है, जो कि रामनवमी के अवसर पर किया जाता है।
पाय डंडा
यह मुख्य रूप से बुंदेलखंड में किया जाता है, जिसमें हाथों में डंडा लेकर नृत्य किया जाता है।
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