भारत की सबसे लंबी पानी की सुरंग, जिसे पहाड़ को चीरकर किया गया है तैयार

Last Updated: Aug 3, 2026, 14:22 IST

पहाड़ों के चीरती हुईं सुरंगें हमें एक एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ तक ले जाती हैं। इस कड़ी में भारत में कई सुरंगें बनी हुई हैं। हालांकि, हाल ही में भारत में सबसे लंबी पानी की सुरंग भी तैयार हुई है। 

पानी की सुरंग
पानी की सुरंग

भारत में आपने अलग-अलग सुरंगों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। ये सुरंगें पहाड़ों को चीरते हुए एक रास्ते को दूसरे रास्ते से जोड़ती हैं। इस कड़ी में भारत में हाल ही में देश की सबसे बड़ी पानी की सुरंग बनकर तैयार हो गई है। खास बात यह है कि इस सुरंग को पहाड़ों को चीरकर बनाया गया है, जो कि विंंध्य पर्वत श्रेणी में आते हैं। यह सुरंग जल विद्युत परियोजना और कृषि के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। इस लेख में हम सुरंग के बारे में जानेंगे।  

कहां बनी है सबसे लंबी पानी की सुरंग 

भारत की सबसे लंबी पानी की सुरंग मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में तैयार की गई है। इस सुरंग की कुल लंबाई 11.95 किलोमीटर है, जो कि भारतीय इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार मानी जा रही है।

17 सालों में बनकर तैयार हुई है सुरंग

पानी की इस सुरंग को करीब 17 सालों की मेहनत में तैयार किया गया है, जिसके लिए इंजीनियर्स की टीम ने टनल बोरिंग मशीन की मदद से पहाड़ को चीरकर नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी के लिए रास्ता बनाया है। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 1610 करोड़ रुपये की लागत आई है। टनल में पानी बिना किसी पंप या बिजली के मदद से ग्रैविटी फ्लो द्वारा पहुंचता है। 

आसान नहीं था सुरंग बनाना

भारत में इस प्रकार की टनल बनाना आसान नहीं था, क्योंकि अपने आप में पहली ऐसी टनल थी, जिसे पानी के लिए तैयार किया जा रहा था। इसके लिए पहाड़ों की चट्टानें काटकर सुरंग तैयार करनी थी। ऐसे में इंजीनियर्स के सामने कई बार चुनौतियां आईं, जिनसे उनके सामने टनल बनाने में काफी परेशानी हुई और कई बार मशीनें भी असफल हो गईं।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट का काम नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की देखरेख में किया गया है। प्राधिकरण द्वारा यहां टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल कर 10.31 मीटर के डायमीटर वाली सुरंग को तैयार किया गया।

पानी की सुरंग से किसे मिलेगा फायदा 

पानी की इस नई सुरंग से विंध्य क्षेत्र के किसानों का लाभ मिलेगा। टनल से नर्मदा नदी का पानी 1450 गांवों तक पहुंचेगा और 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। पानी की आपूर्ति होने से कटनी, जबलपुर, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जैसे जिलों में खेती को बढ़ावा मिलेगा और इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर भी पड़ेगा। साथ ही, इससे किसानों की भूजल पर निर्भरता भी कम होगी।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Aug 3, 2026, 14:22 IST

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