भारतीय नौसेना में हाल ही में परमाणु-संचालित लिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिदमन (Aridhaman) को शामिल किया गया है. करीब 7,000 टन वजनी अरिदमन अपने पूर्ववर्तियों से बड़ी और ज्यादा आधुनिक है। इसमें उन्नत 83 मेगावाट प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर लगा है, जिसे BARC ने विकसित किया है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो K-4 missile (3500 किमी रेंज) या 24 K-15 missile (750 किमी रेंज) ले जा सकती हैं।
भारत की समुद्री परमाणु शक्ति में बड़ा इजाफा
भारत ने स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी INS अरिदमन (Aridhaman) को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया है, जिससे देश की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत हो गई है। यह भारतीय नौसेना की तीसरी एसएसबीएन (SSBN) पनडुब्बी है, जो पहले से मौजूद INS Arihant और INS Arighaat के बाद शामिल हुई है। यह परियोजना बेहद गोपनीय मानी जाती है।
चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत
भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हैं। एसएसबीएन का मतलब “शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर” होता है, जो पानी के अंदर से परमाणु मिसाइल लॉन्च करने में सक्षम होती हैं।
INS अरिदमन की क्या है ताकत: हाई लाइट्स
INS अरिदमन का वजन करीब 7,000 टन है और यह पहले की पनडुब्बियों से बड़ी व ज्यादा स्टेल्थ क्षमता वाली है।
इसमें 83 मेगावाट का एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर लगा है, जिसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने विकसित किया है।
इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो INS अरिहंत से दोगुनी क्षमता प्रदान करते हैं।
यह 3500 किमी रेंज की K-4 missile या 750 किमी रेंज की K-15 missile मिसाइलें ले जा सकती है।
इसकी तैनाती से भारत कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस (Continuous at-sea deterrence) बनाए रख सकता है, यानी हर समय एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में सक्रिय रहेगी।
किसने किया इसका निर्माण
INS Aridhaman (S4), भारत की तीसरी अरिहंत-क्लास परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), का निर्माण विशाखापत्तनम स्थित Ship Building Centre में किया गया है।
भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती
अरिदमन के शामिल होने से भारत “कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस” हासिल करने के करीब पहुंच गया है, यानी हर समय कम से कम एक परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकती है। यह भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देता है।
दूसरे हमले की क्षमता और भविष्य की योजना
एसएसबीएन भारत को सेकंड-स्ट्राइक क्षमता देती हैं, यानी दुश्मन के पहले हमले के बाद भी जवाबी परमाणु हमला संभव रहता है। वर्तमान में भारत के पास तीन पनडुब्बियां हैं और चौथी भी जल्द शामिल करने की योजना है। चार पनडुब्बियों के साथ भारत पूरी तरह मजबूत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर लेगा।
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