हंटर कमीशन और हंटर समिति में क्या अंतर है, जानें यहां
भारत के इतिहास में हंटर आयोग और हंटर समिति का नाम आता है। हालांकि, कई बार लोग इनके नाम और कार्य को लेकर दुविधा में पड़ जाते हैं। इस लेख में हम इस विस्तार से जानेंगे।
इतिहास उठाकर देखें, तो हमें हंटर नाम दो बार देखने को मिलता है। इसमें एक नाम हंटर आयोग से जुड़ा हुआ है, जबकि दूसरा हंटर समिति से जुड़ा हुआ है। आयोग और समिति, दोनों ही महत्त्वपूर्ण थीं, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारी मिली थी। इस लेख में हम दोनों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
हंटर शिक्षा आयोग(1882)
हंटर शिक्षा आयोग का गठन 3 फरवरी, 1882 को लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में किया गया था। इसके अध्यक्ष सर विलियम हंटर थे। इस आयोग का उद्देश्य भारत में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति का अध्ययन कर इसमें सुधार करना था। इस आयोग ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण स्थानीय निकायों को दिया जाना चाहिए। साथ ही, इस आयोग ने महिला शिक्षा पर भी जोर दिया था।
हंटर जांच समिति (1919)
पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 के कांड के बाद सरकार द्वारा अक्टूबर, 1919 में कांड की जांच करने के लिए इस समिति का गठन किया गया था। इसके अध्यक्ष विलियम हंटर थे, जिसमें पांच अंग्रेज और भारत से चिमनलाल सी. शीतलवाड़, पंडित जगतनारायण और सरदार साहिबजादा सुल्तान अहमद खान थे।
इस समिति का उद्देश्य अमृतसर, दिल्ली और बॉम्बे में हुए दंगों और जलियांवाला बाग में जनरल डायर द्वारा की गई गोलीबारी की जांच करना था। आयोग की ओर से 1920 में रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें डायर की आलोचन की गई, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। इस घटना के बाद डायर ने केवल अपने पद से इस्तीफा दिया था, उसे कोई सजा नहीं मिली। आपको बता दें कि इस घटना के बाद हंटर समिति की रिपोर्ट के कारण ही महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया था।
हंटर कमीशन और हंटर समिति में अंतर
हंटर कमीशन का गठन भारत में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के सुधार करने के लिए किया गया था। वहीं, हंटर समिति का गठन 1919 में हुए जलियांवाला बाग कांड की जांच के लिए हुआ था। हालांकि, हंटर समिति की रिपोर्ट से लोगों में अधिक नाराजगी थी। इस रिपोर्ट का असर पूरे देश पर पड़ा था, जिससे असहयोग आंदोलन की नींव पड़ी, लेकिन फरवरी, 1922 में हुए चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने असहोयग आंदोलन वापस ले लिया था।
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