भारत में दो बार राष्ट्रपति बनने वाले एकमात्र व्यक्ति कौन हैं, जानें नाम और इतिहास
भारत में राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होता है। अब तक कुल 15 राष्ट्रपति इस पद की कमान संभाल चुके हैं। इनमें से भारत के एकमात्र व्यक्ति ऐसे भी हैं, जो कि दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं।
भारत में अभी तक कुल 15 राष्ट्रपति रहे हैं। इस कड़ी में देश में इकलौते और इकमात्र ऐसे राष्ट्रपति भी हैं, जो कि दो बार राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनका नाम डॉ. राजेंद्र प्रसाद हैं, जो कि भारत के पहले राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। भारत की राजनीति में उनका कार्यकाल और व्यक्तित्व ऐतिहासिक रहा है। इस लेख में उनके दो बार राष्ट्रपति बनने के बारे में विस्तार से जानेंगे।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का रहा है सबसे लंबा कार्यकाल
आपको बता दें कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय इतिहास में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति पद पर रहे हैं। उन्होंने इस पद पर रहते हुए कुल 12 साल और 107 दिनों तक अपनी सेवाएं दी हैं।
1950 से 1952 तक मनोनित राष्ट्रपति
भारत में जब 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ, तो संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति के साथ उन्हें देश का पहला राष्ट्रपति चुना गया।
कब शुरू हुआ पहला कार्यकाल
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपना पहला कार्यकाल 1952 में शुरू किया था। दरअसल, इस वर्ष आम चुनाव होने के बाद राष्ट्रपति चुनाव हुए थे, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बहुमत से जीत मिली थी।
कब से कब तक रहा दूसरा कार्यकाल
भारत में साल 1957 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोबारा से निर्वाचित हुए और उन्हें लगातार दूसरी बार देश के सर्वोच्च पद की कमान संभालने का मौका मिला।
सादगीपूर्ण जीवन के लिए जाने जाते हैं प्रसाद
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे। उनका जन्म 3 दिसंबर, 1884 में सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। प्रसाद पेशे से एक वकील थे और अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए जाने जाते थे।
-ऐसा कहा जाता है कि प्रसाद राष्ट्रपति के रूप में मिलने वाले वेतन का सिर्फ 50 फीसदी हिस्सा ही अपने पास रखते थे, जबकि बाकी पैसा सरकारी खजाने में छोड़ देते थे।
-उनके पीएम जवाहरलाल नेहरू के साथ कुछ मुद्दों पर वैचारिक मतभेद भी रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा राष्ट्रपति पद की संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया।
'भारत रत्न' से किया गया सम्मानित
डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1962 में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर पटना के सदाकत आश्रम में रहने चले गए थे। देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए साल 1962 में भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा। वहीं, 28 फरवरी 1963 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
क्या कहता है कानून
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 57 के मुताबिक, भारत में कोई भी व्यक्ति कितनी बार भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है। हालांकि, प्रसाद द्वारा दो बार राष्ट्रपति बनने के बाद यह अघोषित परंपरा बन गई थी कि अब कोई भी व्यकित दो बार राष्ट्रपति पद पर नहीं रहेगा।
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