भारत में आपने अलग-अलग मंडियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी पंजाब राज्य के लुधियाना शहर में स्थित है। इस मंडी को खन्ना मंडी के नाम से भी जानते हैं। यह मंडी इतनी बड़ी है कि इसमें प्रतिदिन लाखों टन गेहूं की आवक होती है। यहां से देश के विभिन्न के राज्यों में गेंहू की आपूर्ति की जाती है। इस लेख में हम इस मंडी के बारे में विस्तार से जानेंगे।
कब हुई स्थापना और क्या है इतिहास
खन्ना मंडी की स्थापना 1933 के आसपास हुई थी। स्थापना के वक्त से ही यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ भूमि और किसानों की कड़ी मेहनत के कारण अनाज के व्यापार का मुख्य केंद्र बन गया। देश में जब 'हरित क्रांति' हुई, तो इस मंडी का महत्त्व और भी बढ़ गया था।
क्यों कहा जाता है 'एशिया की सबसे बड़ी मंडी' ?
खन्ना मंडी को एशिया की सबसे बड़ी मंडी कहने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
- यहां सीजन में प्रतिदिन लाखों टन गेंहू और ध
- इस मंडी को अनाज भंडारण और लोडिंग के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जो कि कई एकड़ में फैली हुई है।
- यहां आने वाले खाद्यान को पंजाब के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त, अनाज को भारतीय खाद्य निगम(FCI) के स्टोर और विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।
कैसे काम करती है मंडी?
यहां हम मंडी की कार्यप्रणाली के बारे में समझ लेते हैंः
- मंडी में अनाज की ढेरी लगती है, जिसके बाद सरकारी व निजी खरीददारों के बीच खुली बोली लगती है।
- मंडी में भारत सरकार की 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (MSP) नीति का ध्यान रखा जाता है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
- सीजन के समय यहां बड़ी संख्या में श्रमिक और पल्लेदारों के साथ-साथ मुनीम व ट्रक चालक सक्रिय रहते हैं।
पहले से डिजिटल हुई है मंडी
खन्ना मंडी पहली की तुलना में अब डिजिटल हो रही है। यहां e-Nam की पोर्टल के उपयोग से राष्ट्रीय कृषि बाजार में पारदर्शिता बढ़ी है। वहीं, अनाज की सफाई के लिए अब हाथ की जगह अत्याधुनिक डिजिटल मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।