सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों के लिए अग्रिम स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने यह नीतिगत फैसला लिया है कि जिस न्यायाधीश को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने का प्रस्ताव है, उनका तबादला रिक्ति होने से काफी पहले, लगभग दो महीने पहले किया जा सकता है।
क्या है नई नीति ?
Supreme Court Collegium ने एक अहम नीति फैसला लेते हुए तय किया है कि जिन जजों को किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) बनाया जाना है, उन्हें पहले ही उस हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यह ट्रांसफर आमतौर पर रिक्ति (vacancy) से करीब दो महीने पहले किया जाएगा, ताकि वे नए कोर्ट के कामकाज को समझ सकें।
क्यों लिया गया यह फैसला
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रशासन की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है। कॉलेजियम का मानना है कि पहले से ट्रांसफर होने पर जज नए हाईकोर्ट की प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं से अच्छी तरह परिचित हो जाएंगे और पद संभालते ही प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगे।
बैठक और प्रमुख सदस्य
यह फैसला बुधवार शाम को हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने की। इस कॉलेजियम में जस्टिस विक्रम नाथ, जे.के. माहेश्वरी, बी.वी. नागरत्ना और एम.एम. सुंदरश भी शामिल हैं।
जस्टिस लिसा गिल का ट्रांसफर
नई नीति को लागू करते हुए कॉलेजियम ने Justice Lisa Gill को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। साथ ही, उन्हें वहां मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की गई है, जो अप्रैल में मौजूदा मुख्य न्यायाधीश Dhiraj Singh Thakur के रिटायर होने के बाद प्रभावी होगी।
अन्य नियुक्तियां और पैनल में बदलाव
कॉलेजियम ने जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की भी सिफारिश की है, क्योंकि वर्तमान चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव 5 मार्च को रिटायर हो रहे हैं।
इसके अलावा, जस्टिस श्रिवास्तव एक जांच समिति का हिस्सा थे जो न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े मामले की जांच कर रही है। उनके रिटायरमेंट के बाद, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्री चंद्रशेखर को इस पैनल में नामित किया है, जबकि बाकी सदस्य पहले जैसे ही बने रहेंगे।
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