ACP VS DCP: किसके पास होती है ज्यादा पावर, जानें

Last Updated: May 20, 2026, 18:58 IST

ACP VS DCP: आपने ACP और DCP के बारे में जरूर सुना होगा। ये दोनों ही पद पुलिस विभाग में सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माने जाते हैं, लेकिन लोगों के मन में अक्सर यह सवाल पनपता रहता है कि आखिर ACP और DCP दोनों में से किसके पास असली पावर होती है? आज के इस लेख में हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे।

ACP VS DCP
ACP VS DCP

ACP VS DCP: अगर हम बात ACP और DCP की करें, तो पुलिस सिस्टम के अंतर्गत ये दोनों ही पद काफी अहम माने जाते हैं और जब भी बात मुंबई, दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े महानगरों की कानून-व्यवस्था की बात आती है, तो इन दोनों पदों की ही सबसे ज्यादा चर्चा होती है। ACP और DCP दोनों की शक्तियों और प्रोटोकॉल में काफी फर्क होता है। आमजन के मन में भी यही सवाल अक्सर घर कर जाता है कि इन दोनों में सबसे ज्यादा पावरफुल है कौन? आज इसी विषय पर हमारा यह लेख होगा।

ACP कौन होता है? 

ACP के बारे में जानने से पहले आपको इसकी फुल फॉर्म के बारे में पता होना चाहिए। ACP की फुल फॉर्म होती है असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस। ACP आप दो तरीकों से बन सकते हैं। पहले तरीका यह है कि आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करें या फिर दूसरा तरीका यह है कि राज्य की PSC परीक्षा पास प्रमोशन के जरिए ACP बनें। पहली तरीके के बारे में विस्तार से बात करें, तो सबसे पहले UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होता है। IPS कैडर चुनने के बाद मसूरी और फिर हैदराबाद में 'सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी' में कठिन ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। ट्रेनिंग के बाद जब पहली पोस्टिंग किसी कमिश्नरेट शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई, नोएडा, लखनऊ) में होती है, तब कहीं जाकर ACP का पद मिलता है। 

ACP बनने का दूसरा तरीका यह है कि राज्य की PCS परीक्षा में टॉप रैंक लाने पर चयन DSPके पद पर होता है। अगर पोस्टिंग किसी ऐसे बड़े शहर में की जाती है जहाँ कमिश्नरेट सिस्टम लागू है, तो वहां सीधे ACP का पदनाम दे दिया जाता है।

DCP कौन होता है? 

DCP की फुल फॉर्म होती है डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस। DCP आप दो तरीकों से बन सकते हैं। पहला तरीका यह है कि UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होता है। IPS कैडर प्राप्त करने के बाद ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आपकी पहली पोस्टिंग सीधे ACP के रूप में होती है। 4 से 5 साल की शानदार और बेदाग सेवा पूरी करने के बाद, प्रमोट करके DCP बना दिया जाता है।

DCP बनने का दूसरा तरीका यह है कि सबसे पहले अपने राज्य की सरकारी परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा में टॉप रैंक लाने पर चयन DSPके पद पर होता है। 12 से 15 सालकी बेहतरीन सर्विस के बाद पहले राज्य पुलिस सेवा से प्रमोट करके IPS कैडर दिया जाता है। इसके बाद ही वे DCP बनते हैं। 

ACP और DCP में से ज्यादा पावर किसके पास होती है? 

ACP का मुख्य काम फील्ड पर रहकर अपने अधीन आने वाले 3 से 4 थानों की निगरानी करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। वहीं DCP पूरे जिले का मुखिया होते हैं। उनके पास प्रशासनिक और न्यायिक दोनों तरह की शक्तियां होती हैं। ACP के मुकाबले DCP ज्यादा पावरफुल होते हैं क्योंकि एक DCP के अंतर्गत उस इलाके के 3 से 4 ACP काम करते हैं।   

Farhan Khan is a passionate content writer with over 3 years of experience in creative storytelling, research-based writing, and digital content creation. He curates content on Sarkari Results, Admit Card, Notifications. He covers exams such as UPSC, SSC, Banking, Defense etc.  He completed Master’s in Mass Communication from Guru Jambheshwar University.

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First Published: May 20, 2026, 18:12 IST

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