Mahashivratri 2026: बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद और दूध शिवलिंग पर क्यों करते हैं अर्पित, जानें वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

Last Updated: Feb 14, 2026, 20:51 IST

Mahashivratri 2026:  महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में आस्था के सबसे प्रमुख पर्वों में शामिल है। यह पर्व भगवान शिव की अराधना और उपासना से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए इस दिन का विशेष महत्त्व है, जो कि मंदिरों में पहुंच शिवलिंग पर आस्था के रूप में बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद, दूध और मदार के फूल चढ़ाते हैं। हालांकि, क्या आप इनके पीछे का वैज्ञानिक कारण जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

महाशिवरात्रि 2026
महाशिवरात्रि 2026

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्री का पर्व हिंदू धर्म में आस्था और विश्वास का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है, जिस दिन श्रद्धालु मन में आस्था के साथ मंदिरों में पहुंच विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ भक्त उपवास के रूप में शिव की अराधना करते हैं। शिव की अराधना का यह पर्व प्रकृति पूजा के महत्त्व को भी दर्शाता है।

इस दिन भक्त आस्था के रूप में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध, शहद और जल अर्पण करते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आखिर शिव को यह क्यों चढ़ाया जाता है और इसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण क्या है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

बेलपत्र का वैज्ञानिक आधार

बेलपत्र को एंटीबैक्टिरियल और एंटीवायरल एजेंट माना जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक,महाशिवरात्रि ऋतु परिवर्तन के समय आती है। ऐसे में इस समय संक्रमण बढ़ने की संभावना रहती है। International Journal of Pharma and Bio Sciences (2011) में बेल के औषधीय गुणों (Ethnomedicinal uses) पर शोध भी प्रकाशित है। कुछ शोधकर्ताओं ने यह भी माना है कि बेल में वातावरण में मौजूद विकिरणों और रेडियाधर्मी कणों को अवशोषित करने की क्षमता होती है।

धतूरा और भांग का वैज्ञानिक कारण

आयुर्वेद के मुताबिक, भांग और धतूरे की तासीर ठंडी होती है। इन चीजों में ब्रोन्कोडिलेटर गुण होते हैं। ऐसे में यह शरीर की ऊष्मा और विषैले प्रभावों को कम करने के लिए उपयोगी होते हैं। Charak Samhita में इस जड़ी-बूटी के सीमित उपयोग की बात की गई है। शिव को यह समर्पित करना दर्शाता है कि इंसान अपनी तामसिक प्रवृतियों को त्याग रहा है। हालांकि, धतूरे के सेवन नहीं किया जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव ने विष पिया था, ऐसे में आस्था के तौर पर यह विषैले प्रभाव को कम करने के लिए अर्पित किया जाता है।

क्यों चढ़ाया जाता है शहद और दही

शिवलिंग पर शहद और दही भी चढ़ाया जाता है। शहद एक प्राकृतिक Preservative होता है, वहीं दही Probiotic होता है। इससे शिवलिंग का क्षरण रूकता है। क्योंकि, शिवलिंग जिस पत्थर से बने होते हैं, वे रेडियाधर्मी होते हैं। इस वजह इसे शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। 

शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध और जल 

शिवलिंग पर जलाभिषेक के पीछे थर्मोडायनामिक्स जुड़ा हुआ है। क्योंकि, शिवलिंग जिस पत्थर से बना होता है, उसमें रेडियोधर्मी ऊर्जा होती है। इस वजह से अत्यधिक ताप को कम करने के लिए पानी और दूध को चढ़ाया जाता है। Vedic Physics में इस बात को लेकर चर्चा की गई है।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। लेख में दिए गए तथ्य इन पदार्थों को खाने के लिए प्रेरित नहीं करते हैं।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

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