भारत में युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों की भी एक बड़ी आबादी है। यही वजह है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने स्तर पर कई कल्याणकारी योजनाओं को समय-समय पर लांच करते रहते हैं।
वहीं, कुछ राज्यों ने बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए अलग से बजट का प्रावधान भी किया है। इनमें मध्य प्रदेश राज्य का नाम सबसे टॉप पर आता है। इसके बाद केरलम और राजस्थान का नाम भी आता है, जिन्होंने बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए कई पहल शुरू की हैं।
मध्य प्रदेश ने सबसे पहले पेश किया बुजुर्गों का बजट
मध्य प्रदेश सरकार द्वरा वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए समर्पित बजट का एक विशेष भाग पेश किया था। इसमें उनके कल्याण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान का ध्यान रखा गया था। बजट में बुजुर्गों के लिए पेंशन, तीर्थ दर्शन योजना और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग से फंड का प्रावधान किया गया था।
केरलम ने भी की है पहल
केरलम ने भी बुजुर्गों के लिए पहल की है। इसके तहत राज्य ने राज्य सीनियर सिटीजन पॉलिसी बनाकर बजट का आवंटन किया है। इसमें बुजुर्गों को स्वास्थ्य व अन्य लाभों का प्रावधान किया गया है।
राजस्थान ने शुरू की मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना
राजस्थान राज्य ने भी बुजुर्गों की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना और पेंशन योजना के माध्यम से बुजुर्गों के लाभ के लिए बड़े प्रावधान किये हैं।
बुजुर्गों के लिए क्यों बनयाा गया है अलग से बजट
अब हम यह जान लेते हैं कि आखिर बुजुर्गों के लिए अलग से बजट क्यों बनाया गया है। दरअसल, भारत में बुजुर्गों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2050 तक भारत में करीब 20 फीसदी बुजुर्गों की आबादी होगी। वहीं, बुजुर्गों को विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होती है। ऐसे में अलग से फंड होना जरूरी है। देश में कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जो कि असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनके लए पेंशन होना बहुत जरूरी है।
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