किस नदी को कहा जाता है ‘बिहार का शोक’, जानें यहां

Last Updated: Aug 28, 2026, 12:31 IST

बिहार में बहुत-सी नदियां बहती हैं, लेकिन इनमें एक नदी ऐसी भी है, जिसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है। कौन-सी है यह नदी, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें। 

बिहार का शोक
बिहार का शोक

बिहार में यूं, तो बहुत-सी नदियां बहती हैं, जो कि बिहार में आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से बहुत ही महत्त्वपूर्ण नदियां हैं। हालांकि, इनमें एक नदी ऐसी भी है, जिसे ‘बिहार का शोक’ भी कहा जाता है। यह नदी हर साल बिहार में बाढ़ का कारण बनती है, जिससे हर साल बिहार की अर्थव्यवस्था और कृषि को नुकसान पहुंचता है। कौन-सी है यह नदी, जानने के लिए यह लेख पढे़ं।

किस नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है

कोसी नदी को "बिहार का शोक" (Sorrow of Bihar) कहा जाता है। इस नदी को यह नाम इसके विनाशकारी रूप, हर साल आने वाली भीषण बाढ़ और इसके द्वारा लगातार मार्ग बदलने की वजह से मिला है।

हर साल बदलती है रास्ता 

आपको बता दें कि कोसी दुनिया की उन नदियों में से एक है, जो सबसे ज्यादा और तेजी से अपना रास्ता बदलती हैं। इतिहास उठाकर देखें, तो बीते 250 से 300 वर्षों में कोसी नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 120 से 150 किलोमीटर तक खिसक चुकी है। यह नदी जब रास्ता बदलती है, तो गांव, खेत और बस्तियां रातों-रात जलमग्न हो जाती हैं, जिससे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता।

हिमालय से लाती है भारी मात्रा में गाद 

कोसी नदी नेपाल में हिमालय की ऊंची चोटियों से बहते हुए आती है। पहाड़ों से नीचे आने के दौरान यह अपने साथ गाद, रेत और पत्थरों को लाती है। मैदानी इलाकों में आते ही पानी की गति धीमी हो जाती है और यह गाद नदी के तल में जमा होने लगती है।

ऐसे में नदी की गहराई कम होने के कारण जैसे ही बारिश में पानी बढ़ता है, तो नदी का पानी बांधों और तटबंधों को तोड़कर आसपास के इलाकों में तबाही मचा देता है।

मिथिला की लाइफलाइन भी है कोसी

कोसी नदी जहां एक तरफ बिहार का शोक कही जाती है, तो दूसी तरफ यह मिथिला की लाइफलाइन भी कही जाती है। बाढ़ उतरने के बाद इसके द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी और इसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के कारण यह मखाना, मछली और गर्म फसलों के उत्पादन का मुख्य जरिया बनती है।

ऐसे में एक तरफ जहां कोसी नदी विनाश के लिए जानी जाती है, तो दूसरी तरफ यह विकास के लिए प्रसिद्ध है। इस नदी के पानी में उगने वाली घास से स्थानीय महिलाएं टोकरियां बनाती हैं। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Aug 28, 2026, 12:31 IST

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