भारतीय फसलें और उन्हें होने वाले रोग, देखें लिस्ट
भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। यहां मुख्य रूप से तीन फसल चक्र हैं, जिनमें रबी, खरीफ और जायद शामिल है। इस लेख में हम भारतीय फसलें और उन्हें होने वाले रोगों के बारे में जानेंगे।
विश्व में भारत की पहचान कृषि प्रधान देश के रूप में है। यहां मुख्य रूप से तीन फसल चक्र पाए जाते हैं, जिनमें रबी, खरीफ और जायद शामिल है। कई बार खराब मौसम और वर्षा की कमी से फसलें खराब हो जाती हैं, जबकि कई बार फसलों को रोग भी लग जाता है, जिससे किसानों को नुकसान होता है। ऐसे में देश की खाद्य सुरक्षा के लिए फसलों को विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाना जरूरी होता है।
फसल रोगों के कारणों की बात करें, तो इनके पीछे कवक (Fungi), जीवाणु (Bacteria), विषाणु (Virus) और पोषक तत्वों की कमी को मुख्य कारण माना जाता है।
भारतीय फसल और उन्हें होने वाले रोग
भारतीय फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग पाए जाते हैं। इन फसलों में धान की फसल से लेकर गेहूं, गन्ना और आलू तक शामिल है।
धान के प्रमुख रोग
धान यानि कि चावल एक खरीफ फसल है, जो कि देश में अधिकांश लोगों का मुख्य भोजन है। इसमें ब्लास्ट रोग या झोंका रोग पाया जाता है, जो कि पायरीकुलेरिया ओराइजी नामक फंगी के कारण होता है। इस रोग में पत्तियों पर नाव की तरह भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं।
खैरा रोग- यह धान का प्रसिद्ध रोग है, जो कि बैक्टिरिया या वायरस से नहीं, बल्कि मिट्टी में जिंक की कमी से होता है। इस रोग में पत्तियां पीली हो जाती हैं।
गेहूं के प्रमुख रोग
गेहूं एक रबी फसल है, जिसकी उत्तर व मध्य भारत में अधिक मांग रहती है।
रस्ट या किट्ट रोगः यह रोग तीन प्रकार का होता है, जिसमें काली रस्ट, पीली रस्ट और भूरी रस्ट होती है, जो कि पक्सीनिया नामक फंगी के कारण होता है। इससे गेहूं के तने पर पाउडर की तरह धब्बे बन जाते हैं।
लूज स्मट- यह रोग 'अस्टिलागो नूडा' फंगी के कारण होता है, जिसमें गेहूं की बालियां काली पाउडर से भर जाती हैं और दाने नहीं बन पाते हैं।
टुंडू रोग- यह रोग 'कोरीनोबैक्टीरियम ट्रिटिकी' नामक जीवाणु और 'एंगुइना ट्रिटिकी' के मिलने से होता है।
गन्ने के प्रमुख रोग
रेड रॉटः इस रोग को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है, जो कि 'कोलेटोट्राइकम फाल्केटम' नामक बैक्टिरिया के कारण होता है। इस रोग के होने पर गन्ना अंदर से लाल दिखाई देता है और इसमें से शराब जैसी गंध भी आती है।
आलू के प्रमुख रोग
अगेती और पछेती झुलसाः पछेती झुलसा 'फाइटोफ्थोरा इंफेस्टांस' के कारण होता है। आपको बता दें कि 1845 का 'आयरिश अकाल' इसी रोग की वजह से हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।
ब्लैक हार्टः यह रोग कोल्ड स्टोरेज के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है, जिसमें आलू अंदर से काला पड़ जाता है।
तिलहन और दलहन के रोग
टीका रोगः यह रोग मूंगफली की फसल का है, जो कि 'सर्कोस्पोरा' कवक की वजह से होता है। इसमें पत्तियों पर गोल गहरे भूरे धब्बे पड़ जाते हैं।
उकठा रोग- यह रोग चना और अरहर की दाल में होता है, जो कि फ्यूजेरियम कवक के कारण होता है। इसमें फसल का पौधा सूख जाता है।
सफेद किट्ट- यह रोग सरसों की फसल में होता है, जिसमें पत्तियों के नीचे सफेद रंग के फफोले देखने को मिलते हैं।
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