केरल की सबसे बड़ी नदी, यहां देखें लंबाई और रूट
केरल, दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में शामिल है, जो कि अपनी विविध संस्कृति और विविधता के लिए जाना जाता है। यहां कई प्रमुख नदियों का प्रवाह होता है। इस लेख में हम केरल की सबसे बड़ी नदी के बारे में जानेंगे।
केरल, दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में शामिल है। यहां की संस्कृति और अनूठी परंपराएं इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में कई प्रमुख नदियों का प्रवाह होता है, जो कि कृषि के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण हैं। इस लेख में हम केरल की सबसे बड़ी नदी के बारे में विस्तार से जानेंगे।
केरल की सबसे बड़ी नदी
केरल की सबसे बड़ी नदी की बात करें, तो यह पेरियार नदी है। यह नदी राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि, बिजली उत्पादन और संस्कृति के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण नदी है। यही वजह है कि इसे 'केरल की जीवनरेखा' भीकहा जाता है।
कहां से होता है नदी का उद्गम
पेरियार नदी का उद्गम पश्चिमी घाट की शिवगिरी पहाड़ियों से होता है। यह इलाका तमिलनाडू की सीमा के पास है, जिसके पास सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान और पेरियार राष्ट्रीय उद्यान भी हैं।
कितनी लंबी है नदी
पेरियार नदी की कुल लंबाई 244 किलोमीटर है। यह केरल में पशिम दिशा में बहने वाली सभी 41 नदियों में सबसे टॉप पर आती है। अपनी यात्रा के दौरान यह नदी इडुक्की और एरनाकुलम जैसे जिलों से गुजरती है। अंत में आकर यह नदी 'वेम्बनाड झील' में मिलकर अरब सागर में मिल जाती है।
नदी का आर्थिक और जलविद्युत महत्त्व
केरल में पेरियार नदी औद्योगिक और घरेलू जरूरतों को पूरा कर रही है। इस पर इडुक्की बांध बन हुआ है, जो कि एशिया का सबसे ऊंचे आर्क बांधों में से एक है। यह बांध कुरावन और कुराथी पहाड़ियों के बीच पेरियार नदी पर बनाया गया है। वहीं, इस नदी पर बना मुल्लापेरियार बांध केरल और तमिलनाडु के बीच एक लंबे समय से भू-राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है।
नदी का कृषि और पर्यावरणीय महत्त्व
पेरियार नदी एरनाकुलम और इडुक्की जिलों के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में पानी की आपूर्ति करती है। वहीं, पेरियार राष्ट्रीय उद्यानइस नदी के क्षेत्र में आता है, जिसमें पेरियार टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान है। यह क्षेत्र बाघ और हाथियों के लिए जाना जाता है।
पेरियार नदी का धार्मिक महत्त्व
पेरियार नदी को आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली भी कहा जाता है। अद्वैत वेदांत के प्रणेता रहे शंकराचार्य का जन्म इसी नटी के तट पर हुआ था, जो कि 'कालडी' नामक स्थान है।
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