DU Admissions 2026: PGDAV और साउथ कैंपस के कॉलेजों में हिंदी और संस्कृत ऑनर्स में 50% से अधिक सीटें खाली, देखें लेटेस्ट अपडेट्स
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के ग्रेजुएशन (UG) एडमिशन सेशन 2026-27 के दौरान Traditional Language Courses को लेकर कॉलेजों में काफी सीटें खाली है। कॉलेजों में करीब 50% से अधिक सीटे खाली देखने को मिली है। छात्र इससे जुड़ी सभी जानकारी के बारें में जानने के लिए यहां पढ़ें।
50% Seats Vacant in Hindi-Sanskrit Honours: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के ग्रेजुएशन (UG) एडमिशन सेशन 2026-27 के दौरान Traditional Language Courses को लेकर एक काफी चौंकाने वाला रुझान देखने को मिला है। पीजीडीएवी कॉलेज (साउथ कैंपस) समेत विश्वविद्यालय के कई प्रमुख कॉलेजों में हिंदी (Honours) और संस्कृत (Honours) की करीब 50 प्रतिशत से अधिक सीटें अब भी खाली पड़ी हैं।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) प्रणाली के लागू होने के बाद से छात्रों और पेरेंट्स की चॉइज में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले दौर में छात्र लैंग्वेज आधारित साहित्य डिग्रियों के बजाय प्रत्यक्ष रोजगार देने वाले स्किल-बेस्ड और जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेज जैसे कंप्यूटर साइंस, मीडिया, डेटा एनालिटिक्स और मैनेजमेंट को अपनी पहली पसंद बना रहे है।
PGDAV व अन्य साउथ कैंपस कॉलेजों में खाली सीटों की डिटेल्स
दिल्ली विश्वविद्यालय के एंट्री डेटा के अनुसार, साउथ कैंपस और इवनिंग कॉलेजों में लैंग्वेज कोर्सेज की स्थिति काफी खराब देखने को मिल रही है, जिसके कारण काफी चिंता का विषय बन रहा है। पीजीडीएवी इवनिंग कॉलेज की कुल एक्सेप्टेड सीटों में से आधे से अधिक सीटें अलॉटमेंट के फाइनल स्टेप के बाद भी अभी तक खाली पड़ी है।
| कॉलेज के नाम | प्रोग्राम | कुल उपलब्ध सीटें | खाली पड़ी सीटें | स्थिति (%) |
| PGDAV Evening College | B.A. (Hons) Hindi | 50 | 25 सीटें | 50% खाली |
| PGDAV Evening College | B.A. (Hons) Sanskrit | 54 | 27 सीटें | 50% खाली |
| अन्य साउथ कैंपस कॉलेज | B.A. (Hons) Hindi & Sanskrit | विभिन्न | 40% से 55% | 50% से अधिक खाली |
लैंग्वेज सब्जेक्ट से क्यों दूर हो रहे हैं छात्र? मुख्य कारण क्या है?
विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने इस प्रवृत्ति के पीछे कई प्रमुख कारणों को हाइलाइट्स किया है:
- Employment Perception: छात्र और उनके पेरेंट्स लैंग्वेज की साहित्य की तुलना में ऐसे सिलेब्सों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो ग्रेजुएशन के पूरा होते ही सीधे प्लेसमेंट या करियर ग्रोथ को हासिल कर लें।
- स्किल-ओरिएंटेड कोर्सेज का बढ़ता क्रेज: कंप्यूटर एप्लीकेशन, मास मीडिया, डेटा साइंसेज, मैनेजमेंट स्टडीज और डिजिटल मार्केटिंग जैसे प्रैक्टिकल सब्जेक्ट की मांग में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
- CUET Priority System का प्रभाव: CUET-UG के माध्यम से जब छात्र अपनी कॉलेज व कोर्स Preference List को भरते हैं, तो वे लैंग्वेज सब्जेक्ट को नीचे रखते हैं। हाइयर मार्क्स को प्राप्त करने वाले ज्यादातर छात्र कटऑफ के आधार पर जॉब-ओरिएंटेड कोर्स को चुन लेते हैं।
टीचर्स की चिंता और समाधान की मांग
हिंदी और संस्कृत विभागों के प्रोफेसर ने भारतीय लैंग्वेज के प्रति घटते नंबर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। टीतर्स का कहना है कि यदि छात्र इसी स्थिति को बनाएं रखते है, तो भविष्य में इन सब्जेक्ट के शोध और अध्यापन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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मेरिट आधारित सीधे एडमिशन की मांग: टीचर्स का सुझाव है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को खाली सीटों को भरने के लिए एडमिशन प्रक्रिया में ढील देनी चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र इन लैंग्वेज कोर्सेज को चुनेंगे।
छात्रों के लिए करियर स्कोप
यदि आप भी दिल्ली विश्वविद्यालय में खाली पड़ी सीटों पर एडमिशन लेने के लिए विचार कर रहे हैं, तो इन निम्नलिखित पहलुओं को जानें।
- Spot Admission Round में मौका: DU खाली सीटों को भरने के लिए विशेष Spot Rounds का आयोजन कर रहा है। जिन छात्रों को अभी तक कोई सीट अलॉट नहीं हुई है, वे admission.uod.ac.in पर जाकर लैंग्वेंज सब्जेक्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
- लैंग्वेंज सब्जेक्ट्स में नए करियर ऑप्शन: पहले ये सीटें खाली दिख रही हों, लेकिन हिंदी और संस्कृत सब्जेक्ट्स में आज कई सारे अच्छे करियर ऑप्शन उपलब्ध हैं:
- डिजिटल मीडिया व कंटेंट राइटिंग: ओटीटी प्लेटफॉर्म, कंटेंट क्रिएशन और न्यूज पोर्टल्स में क्षेत्रीय लैंग्वेज की भारी मांग की है।
- कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन ट्रांसलेशन के दौर में संस्कृत और हिंदी भाषा विशेषज्ञों (Linguists) की जरूरत बढ़ गई है।
- सिविल सेवाएं व भारतीय राज्य सेवा: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य PSC एग्जाम में हिंदी व संस्कृत के साथ हाइयर मार्क्स दिलाने वाले ऑप्शनल सब्जेक्ट माने जाते हैं।
Akshara Verma is a digital journalist working in the GK section of Jagran Josh. She writes in Hindi and is a subject matter expert in Education, Current Affairs, General Knowledge, News, History, and Trending National News, delivering accurate and authoritative content for a wide readership.
A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara brings a strong academic and professional foundation to her work. She has previously held content writing and Public Relations roles at Genesis BCW and Dainik Bhaskar, experiences that have sharpened her ability to craft impactful, audience-first content across diverse formats. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.