केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम्' को लेकर बुधवार यानी आज सुबह नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देश के तहत, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में 'वंदे मातरम्' बजना अनिवार्य होगा। सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समय होता है। लेकिन सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा।
यह कदम वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उठाया गया है, ताकि इसकी गरिमा और सम्मान को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे। यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसकी मूल शक्ति के साथ वापस लाने की कोशिश है।
नए नियमों की मुख्य बातें
सरकार द्वारा जारी 10 पन्नों के ऑफिशियल डॉक्यूमेंट में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सभी डिटेल्स जानने के लिए नीचे दी गई टेबल को देखें।
| नियम | डिटेल्स |
| अवधि | अब राष्ट्रगीत कुल 3 मिनट 10 सेकंड तक गाया जाएगा |
| छंद | पहले केवल 2 छंद गाए जाते थे, अब सभी 6 छंद गाना अनिवार्य होगा। |
| क्रम | यदि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत साथ हों, तो वंदे मातरम पहले गाया जाएगा। |
| मुद्रा | राष्ट्रगीत के सम्मान में सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। |
| शुरुआत | गीत शुरू होने से पहले 'मृदंग' या 'ट्रम्पेट' की धुन बजाई जाएगी। |
सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित अवसरों पर राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य होगा:
- राष्ट्रपति का आगमन: किसी भी सार्वजनिक समारोह में राष्ट्रपति के आने और जाने के समय।
- ध्वजारोहण: तिरंगा फहराने के दौरान (परेड को छोड़कर अन्य औपचारिक अवसरों पर)।
- पुरस्कार समारोह: पद्म पुरस्कार और अन्य नागरिक सम्मान समारोहों के दौरान।
- राज्यपाल का संबोधन: राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के भाषण से पहले और बाद में।
पूरे वंदे मातरम् के पूरे 6 छंद क्या हैं?
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में 'वंदे मातरम्' लिखा था, जो 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में छपा। इसमें कुल छह छंद हैं। शुरुआती छंद भारत को मां के रूप में चित्रित करते हैं। बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है। 1937 में कांग्रेस ने फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को अपनाया, क्योंकि कुछ मुस्लिम सदस्यों को देवियों के जिक्र से आपत्ति थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि पूरे छह छंद ही बजेंगे, जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबे होंगे।
छंद 1
वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।सुखदां वरदां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 2
वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।अबला केन मा एत बले।बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।रिपुदलवारिणीं मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 3
वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म।तुमि हृदि, तुमि मर्म।त्वं हि प्राणाः शरीरे।बाहुते तुमि मा शक्ति।हृदये तुमि मा भक्ति।तोमारई प्रतिमा गडि।मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 4
वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।कमला कमलदलविहारिणी।वाणी विद्यादायिनी।नमामि त्वाम्।नमामि कमलां अमलां अतुलां।सुजलां सुफलां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 5
वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।धरणीं भरणीं मातरम्।शत्रु-दल-वारिणीं।मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 6
वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।त्वं हि शक्ति मातरम्।वन्दे मातरम्।।
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