जब भी आप देश की सीमा पर पहुंचेंगे, तो आपको सीमा पर सीमा पर कंटीली तारें देखने को मिलती हैं। इनके माध्यम से दो देशों के बीच सुरक्षा को बनाए रखा जाता है। इन तारों के आसपास सेंसर और हाई रेस्योल्यूशन कैमरे भी लगते हैं। हालांकि, क्या आपने कभी किसी बॉर्डर की तार पर खाली कांच की बोतलों को भी लटके हुए देखा है।
कई बार दुर्गम क्षेत्रों में कैमरे और सेंसर भी काम नहीं आते हैं। ऐसे में ये बोतलें पारंपरिक रूप से सैनिकों की मदद करती आ रही हैं। यह एक बैकअप के रूप में काम करती हैं, जो कि आज से नहीं, बल्कि पारंपरिक रूप से उपयोग में है। इन्हें वर्षों से बॉर्डर पर लगी कंटीली तारों पर लटका दिया जाता है। हालांकि, क्या है इसका कारण, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्यों लटकी होती हैं खाली बोतलें
सीमावर्ती इलाकों में तारों पर खाली बोतलें एक प्रकार के अलार्म का काम करती हैं। जब भी कोई व्यक्ति या जानवर तारों के बीच से गुजरने का प्रयास करता है, तो बोतलें आपस में टकराती हैं, जिसकी तेज आवाज से सैनिक सतर्क हो जाते हैं।
बैकअप के तौर पर इस्तेमाल होती हैं बोतलें
सीमा पर कई इलाके ऐसे होते हैं, जहां हर समय बिजली की सप्लाई मुमकीन नहीं होती है। ऐसे में ये बोतलें हर समय बिना बिजली से चलने वाले सेफ्टी अलार्म का काम करती हैं।
खराब मौसम में बहुत उपयोगी
सीमा पर कई बार तेज बारिश, बर्फबारी व अन्य कारण की वजह से थर्मल पावर, कैमरे या अलार्म फेल हो सकता है, लेकिन ये बोतलें किसी भी मौसम में उपयोगी रहती हैं। क्योंकि, इन्हें काम करने के लिए किसी भी प्रकार की बैट्री या फिर सेंसर की जरूरत नहीं होती है।
सस्ता और आसान साधन
बोतलों का तारों पर लगाना एक बहुत ही सरल प्रक्रिया है, जिसमें कोई खर्च नहीं आता है। वहीं, ये आसानी से उपलब्ध भी हो जाती हैं। रात के सन्नाटे में बोतलों के आपस में टकराने से आवाज तेज सुनाई देती है, जिससे सैनिकों को चौकन्ना होने का मौका मिल जाता है। सैनिक इससे पता लगा लेते हैं कि सीमा पर जानवर है या किसी व्यक्ति द्वारा प्रवेश की कोशिश की गई है।
पांरपरिक रूप से है उपयोगी
सीमावर्ती इलाकों में लोग अपने खेतों की सुरक्षा के लिए भी इस देशी तकनीक का उपयोग करते हैं। इससे किसानों को अपने खेतों को जंगली जानवरों से बचाने में मदद मिलती है। वहीं, सीमा पर लगी फेंसिंग पर भी इसका उपयोग होता है।
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