भारत का वह जिला, जिसे कहा जाता है ‘रेड डायमंड सिटी’, जानें यहां
भारत में अलग-अलग जिलों की अपनी पहचान है। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘रेड डायमंड सिटी’ के तौर पर भी जाना जाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
भारत में आपने अलग-अलग जिलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। ये जिले अपनी अलग-अलग विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें इनकी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक विशेषताएं शामिल हैं। इस कड़ी में भारत में एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘रेड डायमंड सिटी’ के तौर पर भी जाना जाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
कौन-सा जिला कहलाता है ‘रेड डायमंड सिटी’
अब हम भारत की रेड डायमंड सिटी के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि राजस्थान के धौलपुरजिले को 'रेड डायमंड सिटी' (Red Diamond City) कहा जाता है। इसे यह नाम यहां पाए जाने वाले बेहद खास और प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर(Red Sandstone) के कारण मिला है, जिसकी मांग न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में है।
क्यों खास है धौलपुर का लाल पत्थर
धौलपुर में खदानों से निकलने वाला लाल बलुआ पत्थर अपनी मजबूती, फिनिशिंग और नेचुरल चमक के लिए जाना जाता है। इसे स्थानीय और व्यावसायिक भाषा में 'धौलपुर स्टोन'भी कहा जाता है। जिस तरह डायमंड अपनी मजबूती और वैल्यू के लिए प्रसिद्ध है, उसी तरह निर्माण और वास्तुकला की दुनिया में इस लाल पत्थर की गुणवत्ता और मांग हीरे के समान मानी जाती है। इसी कारण धौलपुर को 'रेड डायमंड' कहा गया है।
इन ऐतिहासिक इमारतों में लगे हैं धौलपुर के पत्थर
भारत की कई सबसे प्रसिद्ध, ऐतिहासिक और आधुनिक इमारतों के निर्माण में धौलपुर के इसी लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। इनमें दिल्ली का लाल किला भी शामिल है। इसकी दीवारों और संरचना में इस्तेमाल हुआ लाल पत्थर धौलपुर क्षेत्र की खदानों से ही लाया गया था। वहीं, आगरा के किले में भी धौलपुर स्टोन का उपयोग हुआ है।
इसके अलावा, नई दिल्ली में स्थित पुराने संसद भवन के खंभों से लेकर नए 'संसद भवन'की बाहरी दीवारों और नक्काशी में धौलपुर के लाल और क्रीम रंग के बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, फतेहपुर सीकरी और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में राजस्थान के पत्थरों के साथ-साथ धौलपुर के लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया है।
अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार
धौलपुर जिले की अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा स्टोन माइनिंग और स्टोन कटिंग व पॉलिशिंग उद्योगों पर टिका हुआ है। यहां से हर साल करोड़ों रुपये का लाल पत्थर देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों में निर्यात किया जाता है।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.