पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी इंतजार खत्म हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। सुवेंदु अधिकारी कल सुबह 11 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
बीजेपी विधायक दल की बैठक में लगी मुहर
बीजेपी विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर अमित शाह ने की।
सामिक भट्टाचार्य ने रखा नाम का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की बंगाल इकाई के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सामिक भट्टाचार्य और सुवेंदु अधिकारी दोनों प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे।
बीजेपी नेताओं और विधायकों से की मुलाकात
मुख्यमंत्री पद की घोषणा से पहले सुवेंदु अधिकारी ने बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायकों और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान सरकार गठन और आगामी रणनीति पर भी चर्चा हुई।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में हुआ था। वह वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर कुमार अधिकारी के बेटे हैं।
राजनीतिक माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े सुवेंदु अधिकारी ने बचपन से ही ग्रामीण राजनीति को करीब से देखा। इसी कारण उन्होंने खुद को “भूमिपुत्र” की छवि के रूप में स्थापित किया, जो आज भी बंगाल के मतदाताओं के बीच लोकप्रिय है।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कांथी हाई स्कूल, पूर्व मेदिनीपुर से पूरी की। इसके बाद प्रभात कुमार कॉलेज, कांथी से BA किया और फिर कोलकाता की रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से 2011 में MA की डिग्री हासिल की।
कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत
सुवेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की। वर्ष 1995 में वह कांथी नगर पालिका के पार्षद चुने गए। इसके बाद 2006 में वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कांथी दक्षिण सीट से विधायक बने।
राजनीति में शुरुआती दौर से ही उन्होंने संगठन और जनसंपर्क के जरिए अपनी मजबूत पहचान बनाई। ग्रामीण इलाकों और जंगली महल क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने उन्हें तेजी से लोकप्रिय नेता बना दिया।
नंदीग्राम आंदोलन से मिली बड़ी पहचान
साल 2007-08 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोध आंदोलन ने सुवेंदु अधिकारी को राज्यभर में पहचान दिलाई। भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहते हुए उन्होंने तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस आंदोलन ने ममता बनर्जी को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके बाद सुवेंदु अधिकारी तमलुक लोकसभा सीट से दो बार सांसद बने और 2016 से 2020 तक राज्य सरकार में परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे।