हर साल की तरह इस बार भी 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा, यह देश का 77वां गणतंत्र दिवस आयोजन है। मुख्य समारोह ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर आयोजित होगा, जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी दिन भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल कुल मिलाकर 30 झाकियों का कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन किया जायेगा.
इस अवसर पर भव्य परेड, रंग-बिरंगी झांकियां और देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, संविधान की शक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इसी कड़ी में हम इस खास दिन से जुड़े कुछ अनसुने और रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे, जो इसके महत्व को और भी गहरा बनाते हैं।
गणतंत्र दिवस 2026 का महत्व
26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इसी दिन 1950 में देश में संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह राष्ट्रीय पर्व भारत की लोकतांत्रिक नींव, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और ‘एकता में विविधता’ की भावना को दर्शाता है। पूरे देश में ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति समारोह आयोजित किए जाते हैं।
मुख्य समारोह और परेड
गणतंत्र दिवस का सबसे बड़ा आयोजन नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होता है। राष्ट्रपति ध्वजारोहण करते हैं और वीरता पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। परेड में सेना की टुकड़ियां, आधुनिक मिसाइल सिस्टम, लड़ाकू विमानों की फ्लाईपास्ट और राज्यों की झांकियां शामिल होती हैं। लगभग 28 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी संस्कृति व उपलब्धियां दिखाते हैं। देशभर के स्कूलों और संस्थानों में भी ध्वजारोहण व सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
क्यों चुना गया 26 जनवरी का दिन
26 जनवरी की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि 1930 में इसी दिन लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ की घोषणा की थी। डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली मसौदा समिति ने करीब तीन साल में संविधान तैयार किया। 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ और Government of India Act 1935 की जगह भारतीय संविधान ने ली। इससे भारत में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व की स्थापना हुई।
गणतंत्र दिवस से जुड़े रोचक तथ्य
भारत का पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था। तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति के रूप में ध्वजारोहण किया था। शुरुआती वर्षों में समारोह इरविन स्टेडियम और लाल किले जैसे स्थानों पर हुए, बाद में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) स्थायी स्थल बना। भारत के पहले मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे।
गणतंत्र दिवस परेड को दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य परेड में गिना जाता है। इसमें हजारों सैनिक, ऊंट, घोड़े और मोटरसाइकिल स्टंट शामिल होते हैं। 29 जनवरी को होने वाला ‘बीटिंग द रिट्रीट’ समारोह उत्सव का समापन करता है।
26 जनवरी को देश को गौरवान्वित करने वाले नागरिकों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा जाता है।
गणतंत्र दिवस 2026 क्यों खास
2026 में भारत तकनीक, रक्षा, डिजिटल इंडिया और वैश्विक भूमिका में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में गणतंत्र दिवस देश की लोकतांत्रिक मजबूती और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाता है। परेड की झांकियों में विकास योजनाएं, रक्षा आधुनिकीकरण और डिजिटल प्रगति दिखाई जाती हैं।
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