एक रेलवे इंजन कितना वजन खींच सकता है, यहां जानें

Last Updated: May 22, 2026, 16:35 IST

रेलवे इंजन बहुत ही शक्तिशाली होता है। इसकी शक्ति को हॉर्सपावर में मापा जाता है, जिससे यह पता लगता है कि इंजन द्वारा कितना वजन खींचा जा सकता है।

रेल इंजन कितना शक्तिशाली होता है
रेल इंजन कितना शक्तिशाली होता है

ट्रेन में सबसे आगे रेलवे इंजन होता है, जो कि सबसे अधिक आकर्षक होता है। यह ट्रेन कोच के मुकाबले बहुत ही भारी और शक्तिशाली होता है। यही वजह है कि अकेला इंजन कई टन वजन को खींचने के साथ रफ्तार देता है। रेलवे इंजन की शक्ति को हॉर्सपावर और ट्रैक्टिक एफर्ट में मापा जाता है। एक रेलवे इंजन 6,000 हॉर्सपावर से लेकर 12,000 हॉर्स पावर तक का होता है। इस लेख में हम रेलवे इंजन के बारे में विस्तार से जानेंगे।

क्या होता है हॉर्स पावर

हॉर्सपावर को हिंदी में अश्वशक्ति कहते हैं, जो कि यह बताता है कि इंजन कितनी तेजी से काम कर सकता है। भारत मे सबसे शक्तिशाली इंजन WAG-12 है, जिसकी शक्ति 12,000 HP है। यह इंजन लगभग 6,000 टन वजन खींच सकता है। आपको बता दें कि एक कार 100 से 150 हॉर्सपावर की होती है। ऐसे में आप इस इंजन की तुलना कर सकते हैं।

पैसेंजर ट्रेन के लिए होता है यह इंजन

भारतीय रेलवे द्वारा पैसेंजर ट्रेनों के लिए WAP-6 और WAP-7 का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी शक्ति भी 6,000 HP तक होती है। यह ट्रेन को 140-160 किमी/घंटा की रफ्तार तक ले जा सकते हैं। 

क्या होता है ट्रैक्टिव एफर्ट 

ट्रेन के इंजन के लिए सिर्फ हॉर्सपावर ही सब कुछ नहीं है, बल्कि ट्रेन को खींचने के लिए शुरुआती खिंचाव भी बहुत जरूरी है। इसमें बहुत शक्ति लगती है, जिसे ट्रैक्टिव एफर्ट कहा जाता है। एक खड़ी हुई ट्रेन को हिलाने के लिए बहुत शक्ति चाहिए होती है। आपको बता दें कि वैग-9 जैसे इंजन का शुरुआती खिंचाव 500 किलोन्यूटन तक होता है। यह इतना अधिक होता है कि लोहे की मोटी जंजीरों को भी तोड़ सकता है।

कैसे काम करते हैं इंजन 

रेलवे इंजन के नीचे ट्रैक्शन मोटर लगी होती है, जो कि पहियों को चलाने का काम करती हैं। इंजन ऊपर लगे बिजली के तारों से 25,000 वोल्ट की बिजली लेते हैं, जिसे ट्रांसफॉर्मर की मदद से कंवर्ट कर पहियों से जुड़ी मोटरों में भेजा जाता है और पहिये रफ्तार पकड़ते हैं।

भारी बनाए जाते हैं रेलवे इंजन

भारतीय रेलवे के इंजन को जानबूझकर भारी बनाया जाता है। एक रेलवे इंजन का वजन 120 से 160 टन तक होता है। क्योंकि, यदि रेलवे इंजन ही हल्का होगा, तो इंजन के पहिये अपने पीछे लगी भारी ट्रेन को खींचने के बजाय एक ही जगह पर फिसलते रहेंगे। वजन अधिक होने और शक्ति मिलने की वजह से पहिये आगे बढ़ते हैं। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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First Published: May 22, 2026, 16:35 IST

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