DM और SDM की पोस्ट में क्या अंतर होता है? जानें कौन कितना ताकतवर
DM VS SDM: अगर हम बात DM और SDM की बात करें, तो यह दोनों की पद अपने आप में प्रतिष्ठित होते हैं। इन पदों का अपना रूतबा होता होती है, जिससे खूब शोहरत मिलती है। सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के बाद ही उम्मीदवार DM या SDM बनता है।
DM VS SDM: सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को पास करने के बाद ही उम्मीदवार DM या SDM बनता है। हालांकि, इस परीक्षा को पास करना आसान नहीं होता। इसे पास करने के लिए कड़ी मेहनत, लगन और सही रणनीति की आवश्यकता होती है। अक्सर लोग DM और SDM पद को लेकर कंन्फ्यूज रहते हैं कि किस पद में ज्यादा ताकत होती है और इन्हें सैलरी कितनी मिलती है? आज के इस लेख में हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देंगे। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
DM कौन होता है?
आपको DM के बारे में जानने से पहले इसकी फुल फॉर्म के बारे में जानते हैं। DM की फुल फॉर्म डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होती है। DM बनने के लिए सबसे पहले यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होता है। IAS में चयनित होने के बाद LBSNAA में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद SDM या असिस्टेंट कमीशनर के रूप में तैनात किया जाता है। लगभग 5 से 7 साल के फील्ड अनुभव और शानदार सर्विस रिकॉर्ड के बाद DM पद मिलता है।
SDM कौन होता है?
SDM के बारे में जानने से पहले चलिए इसकी फुल फॉर्म के बारे में जान लेते हैं। SDM की फुल फॉर्म होती है सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट। SDM बनने के लिए सबसे पहले यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होता है। IAS में चयनित होने के बाद LBSNAA में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही कोई उम्मीदवार SDM या असिस्टेंट कमीशनर बनता है।
DM और SDM में से कौन होता है ज्यादा पावरफुल?
DM भारत के एक जिले में एक प्रमुख प्राधिकारी होता है। भारत में DM को राज्य सरकार द्वारा हर जिले के लिए चुना जाता है। जबकि SDM एक सब डिवीजन का मुख्य अधिकारी होता है। SDM एक प्रशासनिक अधिकारी होता है, जो देश के सरकारी ढांचे के आधार पर जिले के लेवल से नीचे होता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि SDM के मुकाबले DM के पास ज्यादा ताकत होती है।
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