भारत का वह शिव मंदिर, जहां शिवलिंग के सामने नहीं है नंदी की मूर्ति
भारत में आपने अलग-अलग शिव मंदिर देखे होंगे, जो कि हिंदू धर्म में आस्था का प्रमुख केंद्र होते हैं। प्रत्येक शिव मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति होती है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक शिव मंदिर ऐसा भी है, जिसमें नंदी की मूर्ति नहीं है।
हिंदू धर्म में शिव मंदिर आस्था के बड़े केंद्र होते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। इस कड़ी में प्रत्येक शिव मंदिर में शिवलिंग के सामने हमें नंदी की मूर्ति देखने को मिलती है। लेकिन, कपालेश्वर मंदिर ऐसा है, जहां शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति नहीं बनी है। इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है, जिस वजह से आज तक यहां नंदी की मूर्ति स्थापित नहीं की गई है।
कहां है कपालेश्वर मंदिर
कपालेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर बना हुआ है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर है, जहां तक पहुंचने के लिए कुछ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
कब हुआ निर्माण
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु ने करवाया था। हालांकि, 1680 में इस मंदिर को आक्रमणकारियों ने नुकसान पहुंचाया। वहीं, 1738 में कोली समुदाय द्वारा 5000 रुपये खर्च कर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया। साल 1763 में मराठा सरदार जगजीवनराव पवार और कृष्णाजी पवार पाटिल ने 25,000 रुपये खर्च कर यहां बड़ा मुख्य हॉल और नदी से ऊपर जाने वाली सीढ़ियों का निर्माण करवाया था।
मंदिर को लेकर पौराणिक कहानी
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान ब्रह्मा के पांच मुख थे, जिनमें से एक मुख से वह भगवान विष्णु और शिव की आलोचना करते रहते थे। ऐसे में एक बार क्रोध में आकर भगवान शिव ने ब्रह्मा जी का वह 5वां सिर काट दिया और इससे शिव पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया। वह कटा हुआ सिर शिव के हाथ से चिपक गया था।
जब नंदी बने गुरु
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, पाप से मुक्ति पाने के लिए शिव जी पूरे ब्राह्मांड में भटके और अंत में पंचवटी पहुंचे, जहां उन्हें एक नंदी ने गोदावरी नदी के रामकुंड में स्नान करने का उपाय बताया, जिससे वहां ब्रह्मा जी का कपाल यानि कि सिर छूट गया। ऐसे में इस जगह का नाम कपालेश्वर पड़ा। यहां शिव जी को नंदी ने राह दिखाई, जिस वजह से शिव जी ने नंदी को अपना गुरु माना और अपने सामने बैठने से मना कर दिया। इस मान्यता के आधार पर आज भी मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति नहीं है।
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