पटना के नाम से जाने जाने से पहले इस शहर को प्राचीन काल में पाटलिपुत्र कहा जाता था। यह भारतीय इतिहास के सबसे महत्त्वपूर्ण शहरों में से एक था और इसने कई महान साम्राज्यों की राजधानी के रूप में काम किया। पाटलिपुत्र अपनी शक्ति, संस्कृति और ज्ञान के लिए जाना जाता था।
इसे पाटलिपुत्र के नाम से कब जाना जाता था?
पाटलिपुत्र की स्थापना 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में मगध के राजा अजातशत्रु ने की थी। यह चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे प्रसिद्ध शासकों की राजधानी बना। उनके शासन में पाटलिपुत्र एक प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
“पाटलिपुत्र” का क्या मतलब है?
पाटलिपुत्र नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: “पाटलि”, जिसका मतलब एक तरह का फूल या पेड़ है और “पुत्र”, जिसका अर्थ है बेटा। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि इसका मतलब “पाटलि वृक्ष का पुत्र” है। कुछ प्राचीन ग्रंथों में इस नाम से जुड़ी कहानियां भी मिलती हैं।
पाटलिपुत्र से पटना नाम कैसे पड़ा?
सदियों के दौरान पाटलिपुत्र का नाम धीरे-धीरे बदल गया। मध्यकाल और बाद में मुगल शासन के दौरान यह नाम छोटा होकर पटना हो गया। जब तक अंग्रेज आए, तब तक पटना एक प्रसिद्ध नाम बन चुका था और यह शहर का आधिकारिक नाम बन गया।
पाटलिपुत्र का ऐतिहासिक महत्व
पाटलिपुत्र सिर्फ एक राजधानी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, धर्म और व्यापार का केंद्र भी था। यह शहर विद्वानों, बड़े महलों और शानदार इमारतों के लिए जाना जाता था। मेगस्थनीज और फाहियान जैसे प्राचीन यूनानी और चीनी यात्रियों ने इस शहर की सुंदरता और मजबूती के बारे में लिखा है।
आज का पटना कैसा है?
आज, पटना बिहार की राजधानी है और दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे हुए शहरों में से एक है। यह पूर्वी भारत का एक महत्त्वपूर्ण शहर बना हुआ है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है।
पटना के बारे में रोचक तथ्य
-पटना, जिसे मूल रूप से पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था, दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे हुए शहरों में से एक है। इसका इतिहास 2,500 से भी ज्यादा साल पुराना है, जिस कारण यह प्राचीन भारतीय समय में एक प्रमुख केंद्र था।
-पटना ने मौर्य, गुप्त, शुंग और मगध जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों की राजधानी के रूप में काम किया। चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे प्रसिद्ध शासकों ने यहीं से शासन किया।
-यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज और चीनी यात्रियों फाहियान और ह्वेनसांग ने पटना (पाटलिपुत्र) का दौरा किया था। उन्होंने इसे एक भव्य और सुनियोजित शहर बताया था, जिसमें मजबूत दीवारें, बगीचे और बड़ी इमारतें थीं।
-पटना, नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों के पास स्थित है। यह बोधगया के भी करीब है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस वजह से यह बौद्ध धर्म और शिक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण जगह है।
-आज, पटना बिहार की राजधानी और पूर्वी भारत का एक बढ़ता हुआ शहर है। यह शहर अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ता है और यह अपने शिक्षण संस्थानों, गंगा घाटों और सांस्कृतिक त्योहारों के लिए जाना जाता है।
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