संसद को चलाने में प्रति मिनट आता है 2.5 लाख रुपये खर्च, एक दिन में लगते हैं 9 करोड़ रुपये
संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है। यह 20 जुलाई, 2026 से शुरू हुआ है, जो कि 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि संसद को चलाने में प्रति मिनट 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है ? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
संसद का मानसून सत्र 2026 शुरू हो चुका है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। इस सत्र में सरकार द्वारा अलग-अलग बिल पेश करने की तैयारी है। सदन की पूरी कार्यवाही पूरे 7 घंटे तक होती है और प्रत्येक मिनट की कार्यवाही का खर्च 2.5 लाख रुपये आता है। वहीं, एक घंट की कार्यवाही में 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन कई बार हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ जाता है, जिससे संसद पूरी तरह से नहीं चल पाती है। यह जानकारी संसद टीवी और समय-समय पर कई बार पीठासीन अधिकारियों द्वारा साझा की गई है।
संसद के कितने सत्र होते हैं
संसद के तीन सत्र होते हैं, जिनमें एक बजट सत्र, शीत सत्र और मानसून सत्र होता है। इन तीनों सत्र का आयोजन अलग-अलग समय पर किया जाता हैः
बजट सत्र- फरवरी से लेकर मई
मानसून सत्र- जुलाई से लेकर अगस्त-सितंबर
शीतकालीन सत्र- नवंबर से लेकर दिसंबर तक
एक दिन में कितनी देरी चलती है संसद
संसद की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होती है, जो कि शाम 6 बजे तक चलती है। इस दौरान सांसदों को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक लंच का समय दिया जाता है। इस प्रकार संसद की कुल कार्यवाही सिर्फ 6 घंटे ही चलती है।
एक दिन में कितना आता है संसद चलाने का खर्च
संसद की एक घंटे की कार्यवाही में 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लंच का एक घंटा हटाकर संसद एक दिन में सिर्फ 6 घंटे चलती है, ऐसे में यदि इन 6 घंटों का हिसाब लगाया जाए, तो संसद को एक दिन में चलाने का खर्च 9 करोड़ रुपये आता है। वहीं, पूरे सत्र की बात करें, तो एक पूरे सत्र में 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
कहां-कहां खर्च होता है पैसा
संसद को चलाने में इन रुपयों को अलग-अलग मदों में खर्च किया जाता है, जो कि इस प्रकार हैंः
-पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों का खर्च
-संसद की सफाई, बिजली और पानी का खर्च
-संसद सचिवालय के कर्मचारियों का खर्च
-सांसदों के वेतन का खर्च
-सत्र की कार्यवाही के दौरान सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं का खर्च
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