भारत को नदियों का देश भी कहा जाता है। यहां उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक अलग-अलग नदियों का प्रवाह होता है। हमारे देश में नदियां सिर्फ पीने के पानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक महत्त्व भी है। यहां नदियों को मां की उपाधि दी गई है। यही वजह है कि भारत में हमें विभिन्न घाटों पर नदियों की आरती होते हुए दिख जाएगी। खास बात यह है कि यहां कुछ नदियों को उनके मूल नाम के अलावा उपनाम से भी जाना जाता है। इस कड़ी में यहां एख ऐसी नदी भी है, जिसे लाल नदी भी कहा जाता है। कौन-सी है यह नदी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस नदी को कहा जाता है लाल नदी
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत में किस नदी को लाल नदी भी कहा जाता है। आपको बता दें कि भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी को लाल नदी भी कहा जाता है।
असम में कहा जाता है लाल नदी
ब्रह्मपुत्र नदी को मुख्य रूप से असम में लाल नदी कहा जाता है। यहां इसे ‘लुईत’ या ‘हाओ लाओ’ कहा जाता है। इसका अर्थ लाल रंग की नदी से होता है। यही वजह है कि बाकी क्षेत्रों में भी इसे लाल नदी के रूप में पहचान मिली है।
क्यों कहा जाता है लाल नदी
ब्रह्मपुत्र नदी को लाल नदी कहे जाने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
क्या है वैज्ञानिक कारण
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलती है और भारत के अरूणाचल प्रदेश और असम से गुजरती है। इस दौरान यह अपने साथ मिट्टी और गाद लेते हुए बहती है। यदि भौगोलिक आधार पर देखें, तो इस क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी में ऑयरन ऑक्साइड की मात्रा अधिक है। ऐसे में मानसून के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर मिट्टी का कटाव होता है और इसमें मिट्टी मिल जाती है। मिट्टी के मिलने से नदी के पानी का रंग लाल रंग का हो जाता है।
क्या है धार्मिक कारण
असम के गुवाहाटी में कामाख्या देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां हर साल मानसून में अम्बुबाची मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता के मुताबिक, लोग इसे देवी से जोड़ते हुए इसका संबंध सीधा कामाख्या देवी से बताते हैं। लोगों का मानना है कि एक विशेष अवधि के दौरान ही पानी का रंग लाल होता है।
रोचक तथ्यः आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ब्रह्मपुत्र नदी भारत की सबसे गहरी नदी है। तिनसुकिया जैसे स्थान पर इसकी गहराई 380 फीट तक होने का अनुमान है। ऐसे में यह भारत की सबसे गहरी नदी मानी जाती है।
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