मध्य प्रदेश में कहां से आया राई नृत्य, क्या है इतिहास, जानें यहां
आपने मध्य प्रदेश राई लोकनृत्य के बारे में पढ़ा और सुना होगा। यह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
राई मध्य प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लोकनृत्य है। यह मुख्य रूप से बुंदेलखंड और बघेलखंड क्षेत्रों में रचा-बसा है। इसे बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है और यह खुशी, उत्सव और शुभ अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है। इस लेख में हम राई की उत्पत्ति और इससे जुड़े महत्त्वपूर्ण फैक्ट्स के बारे में जानेंगे।
कहां से आया 'राई' शब्द
'राई' नृत्य की उत्पत्ति की कहानी लोक-परंपराओं, कृषि संस्कृति और सामाजिक संरचना से से जुड़ी हुई है। लोक-मान्यताओं के अनुसार, 'राई' शब्द की उत्पत्ति राई यानि सरसों के बारीक दाने से हुई है। जिस प्रकार सरसों के दाने को हाथ में लेकर घुमाने पर वह मटकता है और बर्तन में डालने पर तेजी से थिरकता है, ठीक उसी प्रकार इस नृत्य में नर्तकी की कलाई, कमर और कदमों की रफ्तार तेज होती है।
राजा-महाराजाओं से जुड़ाव
ऐतिहासिक रूप से बुंदेलखंड में जब राजा-महाराजा या बुंदेला शासक युद्ध जीतकर लौटते थे या उनके घर में जन्मोत्सव या विवाह जैसा शुभ अवसर होता था, तब वे अपनी प्रजा और दरबार के मनोरंजन के लिए इस नृत्य का आयोजन करवाते थे। कालसर्प की गति और राई के दानों जैसी चपलता के कारण इस नृत्य शैली का नाम 'राई' पड़ा।
बेड़िया समाज की संस्कृति
शुरुआत में राई नृत्य मुख्य रूप से बुंदेलखंड की बेड़िया जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता था। इन्हें लोक-भाषा में 'राई' या 'बेड़नी' कहा जाता था। इनके साथ पुरुष ढोलक बजाते थे। समय के साथ यह नृत्य किसी एक वर्ग तक सीमित न रहकर पूरे बुंदेलखंड का सबसे लोकप्रिय लोकनृत्य बन गया।
क्या होता है राई नृत्य
राई नृत्य की प्रस्तुति का अपना एक खास शास्त्रीय और लोक-ढांचा होता है। इसके बीच-बीच में हास्य-व्यंग्य और सामाजिक मुद्दों पर आधारित छोटे-छोटे नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं, जिन्हें 'स्वांग' कहा जाता है। इससे दर्शक पूरी रात बंधे रहते हैं। राई नृत्य का मुख्य आकर्षण इसकी तेज गति होती है। नर्तकी ढोलक की ताल के साथ गति बदलती है।
जब ढोलक वादक अपनी थाप तेज करता है, तो नर्तकी के घुंघरू और नृत्य की गति भी तेज हो जाती है। पारंपरिक रूप से रात में राई नृत्य के दौरान रोशनी के लिए राई के चेहरे के सामने एक व्यक्ति दिया या मशाल लेकर खड़ा होता था, ताकि उसके भाव अभिव्यक्त हो सकें।
राई नृत्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान
राई लोकनृत्य को विलुप्त होने से बचाने और इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाने में मध्य प्रदेश के पद्मश्री पुरस्कार विजेता रामसहाय पांडे का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने पारंपरिक राई नृत्य को मृदंग वादन के साथ एक लोक-कला के रूप में मंच प्रदान किया, जिसके लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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