दुनिया के किस देश को कहा जाता है ‘दक्षिण का ब्रिटेन’, जानें यहां
आपने दुनिया में अलग-अलग देशों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, इनमें एक देश ऐसा भी है, जिसे ‘दक्षिण का ब्रिटेन’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
दुनिया में अलग-अलग देश हैं, जो कि अपनी विभिन्न विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में यहां एक ऐसा देश भी है, जिसे ‘दक्षिण का ब्रिटेन’ भी कहा जाता है। यह नाम इस देश को सिर्फ भौगोलिक रूप से नहीं मिला है, बल्कि इसका जुड़ाव ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की वजह से है। क्या आप इस देश के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
किस देश को कहते हैं ‘दक्षिण का ब्रिटेन’
दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपीय देश न्यूजीलैंड को 'दक्षिण का ब्रिटेन' कहा जाता है। यह उपनाम इसे केवल इसके भौगोलिक स्वरूप के कारण नहीं, बल्कि इसके गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों के कारण दिया गया है। 19वीं शताब्दी में जब ब्रिटिश निवासियों ने दुनिया के दूसरे छोर पर स्थित इस देश में बसना शुरू किया, तो उन्हें यहां के वातावरण में अपने ब्रिटेन की स्पष्ट झलक दिखाई दी।
न्यूजीलैंड को 'दक्षिण का ब्रिटेन' कहे जाने के मुख्य कारण
न्यूजीलैंड को दक्षिण ब्रिटेन कहने के पीछे के कई कारण हैंः
-जिस प्रकार ब्रिटेन यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट से दूर एक द्वीपीय देश है, उसी प्रकार न्यूजीलैंड भी ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक अलग-थलग द्वीपीय राष्ट्र है। ब्रिटेन की तरह ही न्यूजीलैंड भी मुख्य रूप से दो बड़े द्वीपों उत्तरी द्वीप और दक्षिणी द्वीप में बंटा हुआ है।
-दोनों देशों का कुल क्षेत्रफल लगभग एक समान है। ब्रिटेन का एरिया लगभग 2,42,000 वर्ग किमी है और न्यूजीलैंड का एरिया लगभग 2,68,000 वर्ग किमी है। न्यूजीलैंड के हरे-भरे चरागाह, घुमावदार पहाड़ियां, झीलें और लंबी तटरेखाएं बिल्कुल ब्रिटिश ग्रामीण जैसी दिखती हैं।
-न्यूजीलैंड की जलवायु काफी हद तक ब्रिटेन से मिलती-जुलती है। यहां भी समुद्री जलवायु पाई जाती है, जहां मौसम सुहावना रहता है, सर्दियां बहुत ज्यादा नहीं होतीं और साल भर पर्याप्त बारिश होती है। इसी आबोहवा के कारण ब्रिटिश प्रवासियों को यहां बसने में आसानी हुई।
क्या है ऐतिहासिक और राजनीतिक जुड़ाव
साल 1840 में स्थानीय माओरी सरदारों और ब्रिटिश क्राउन के बीच 'वाइटंगी की संधि' पर हुई थी, जिसके बाद न्यूजीलैंड आधिकारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का उपनिवेश बन गया। ब्रिटिश योजनाकारों ने जानबूझकर इस नई कॉलोनी को ‘दक्षिणी गोलार्ध के ब्रिटेन’ के रूप में डिजाइन करने का प्रयास किया था।
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