भारत में ‘One Man Boundary Force’ किस व्यक्ति को कहा जाता है, जानें यहां
भारत में आपने अलग-अलग व्यक्तियों और उन्हें दी गई उपाधियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, इनमें एक व्यक्ति ऐसे भी हैं, जिसे इतिहास में ‘One Man Boundary Force’ की उपाधि दी गई थी। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत में आपने अलग-अलग महान व्यक्तियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इनमें कुछ व्यक्तियों को उनके महान कार्यों की वजह से उन्हें उनके मूल नाम के अलावा विशेष उपनाम की उपाधि दी गई है। इस कड़ी में भारत में एक व्यक्ति ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें ‘One Man Boundary Force’ के नाम से भी जाना जाता है। कौन थे यह व्यक्ति और किसने और क्यों दी थी यह उपाधि, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस व्यक्ति को कहा जाता था ‘One Man Boundary Force’
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत में राष्ट्रपति यानि कि महात्मा गांधी को ‘One Man Boundary Force’ के नाम से भी जाना जाता था। उन्हें यह उपाधि लॉर्ड माउंटबेटन ने दी थी। यह उपाधि माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में भारत के विभाजन और आजादी के दौरान बंगाल में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा को महात्मा गांधी द्वारा अकेले अपने अहिंसात्मक प्रभाव से शांत करने पर दी गई थी।
पंजाब और बंगाल में भड़क गए थे दंगे
जब 15 अगस्त 1947 को पूरा देश दिल्ली में आजादी का जश्न मना रहा था, तब महात्मा गांधी दिल्ली के समारोह में शामिल नहीं हुए थे। वह उस समय पश्चिम बंगाल के कोलकाता के नोआखली में थे। रेडक्लिफ रेखा खींचे जाने के बाद पंजाब और बंगाल में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठे थे।
पंजाब ने भेजी गई सेना
पंजाब में दंगे और हिंसा रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार ने लगभग 55,000 सशस्त्र ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों की एक बड़ी सैन्य टुकड़ी तैनात की थी। इसके बावजूद पंजाब में बड़े पैमाने पर हिंसा, नरसंहार और विस्थापन नहीं रुक पा रहा था। वहीं, बंगाल में साम्प्रदायिक तनाव अधिक था, लेकिन वहां कोई सेना तैनात नहीं थी। वहां केवल महात्मा गांधी मौजूद थे।
क्यों कहा जाता है 'वन मैन बाउंड्री फोर्स'
कोलकाता में हिंसा रोकने के लिए गांधीजी ने 13 अगस्त 1947 से ही एक मुस्लिम बहुल इलाके में प्रवास शुरू किया और अनशनपर बैठ गए। गांधीजी के इस कदम और शांति की अपील का प्रभाव इतना गहरा हुआ कि कुछ ही दिनों के भीतर दंगाई अपने हथियार गांधीजी के कदमों में डालकर शांति बनाए रखने की कसम खाने लगे। ऐसे में जहां पंजाब में 55,000 सैनिकों की फौज भी हिंसा को काबू में नहीं कर पा रही थी, वहीं बंगाल में अकेले गांधीजी के प्रभाव ने साम्प्रदायिक तनाव को शांत कर दिया और दंगे पूरी तरह थम गए।
माउंटबेटन ने दिया पत्र
गांधीजी के इस प्रभाव को देखकर भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने 26 अगस्त 1947 को महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी को वन मैन बाउंड्री फोर्स कहा था।
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