उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी रामसर साइट, जिसमें मिलता है भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव
यूपी के अलग-अलग जिलों में हमें रामसर स्थल देखने को मिलते हैं। हाल ही में यूपी में सुरहा ताल देश का 100वां और यूपी का 13वां रामसर स्थल बना है। इस लेख में हम यूपी के सबसे बड़े रामसर स्थल के बारे में जानेंगे।
रामसर साइट पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय रूप से बहुत ही महत्त्वपूर्ण साइट होती हैं, जिन्हें 1971 में हुए रामसर कन्वेंशन के तहत चिन्हित कर संरक्षित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में कुल 13 रामसर साइट हैं। साल 2026 में जून में बलिया जिले के सुरहा ताल को 13वें रामसर स्थल के रूप में शामिल किया गया था, जो देश का 100वां रामसर स्थल भी है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यूपी की सबसे बड़ी रामसर साइट कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी रामसर साइट
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी रामसर साइट 'ऊपरी गंगा नदी'है। यह एरिया गंगा नदी के उस हिस्से को कवर करता है, जो बृजघाट यानि हापुड़ से लेकर नरोरा बैराज यानि बुलंदशहर तक फैला हुआ है।
रामसर साइट का कितना है एरिया
यह साइट लगभग 26,590 हेक्टेयर (265.9 वर्ग किलोमीटर) के बड़े एरिया में फैली हुई है, जो कि उत्तर प्रदेश के मुख्य रूप से हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा और संभल के बड़े हिस्से को कवर करती है।
कब मिला रामसर साइट का दर्जा
ऊपरी गंगा नदी एरिया को 8 नवंबर 2005 को UNESCO द्वारा अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि के रूप में नामित किया गया था। ऊपरी गंगा नदी का यह क्षेत्र जलीय जीवन, पौधों और प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्राकृतिक आवास की सुविधा देता है।
रामसर साइट में पाए जाने वाले जीव
इस रामसर साइट पर भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन विशेष रूप से पाया जाता है। इसके अलावा, यहां संकटग्रस्त घड़ियाल और कछुओं की विभिन्न दुर्लभ प्रजातियां जैसेः रेड-क्राउन रूफ्ड टर्टल पाई जाती हैं। यहां के पानी में लगभग 80 से अधिक मछलियों की प्रजातियां और 100 से अधिक देशी व प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां रहती हैं।
साइट का सामाजिक और धार्मिक महत्त्व
इस क्षेत्र में बृजघाट, अनूपशहर घाट और राजघाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्नान घाट स्थित हैं, जहां साल भर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। यह नदी क्षेत्र आसपास के कृषि क्षेत्रों के लिए जल आपूर्ति का प्राइमरी सोर्स है। नरोरा बैराज से निकलने वाली 'लोअर गंगा कैनाल' बड़े पैमाने पर सिंचाई में मदद करती है। हालांकि, अपने बड़े एरिया के बावजूद इस आर्द्रभूमि को कृषि कचरे से होने वाले प्रदूषण, अवैध खनन, गाद जमने और पानी के घटते स्तर जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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