गल्फ ऑफ कच्छ पर स्थित है भारत का कौन-सा बंदरगाह? कहलाता है समुद्री व्यापार का ‘पावरहाउस’
देश के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट गुजरात के कच्छ जिले में कच्छ की खाड़ी पर स्थित है, जिसे पहले कांडला पोर्ट के नाम से जाना जाता था।
हर दिन जब विशाल मालवाहक जहाज अरब सागर की लहरों को चीरते हुए गुजरात की कच्छ की खाड़ी में प्रवेश करते हैं, तो उनके साथ केवल कंटेनर या सामान ही नहीं ट्रांसफर होता, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी आगे बढ़ती है। इन्हीं जहाजों का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है दीनदयाल बंदरगाह, जिसे पहले कांडला पोर्ट के नाम से जाना जाता था।
यह बंदरगाह दशकों से भारत के समुद्री व्यापार की धुरी बना हुआ है। पश्चिमी तट पर इसकी रणनीतिक स्थिति, आधुनिक बुनियादी ढांचा और विशाल कार्गो क्षमता इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में शामिल करती है।
कच्छ की खाड़ी का रणनीतिक स्थिति
दीनदयाल बंदरगाह गुजरात के कच्छ जिले में कांडला क्रीक पर स्थित है। यह क्षेत्र कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch) का हिस्सा है, जो सीधे अरब सागर से जुड़ा हुआ है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
प्रमुख समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच
यहां से मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के प्रमुख समुद्री मार्गों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है। यही वजह है कि उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के उद्योगों के लिए यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है।
एक छोटे जेट्टी से शुरू हुआ सफर
आज जिस बंदरगाह को देश के सबसे बड़े समुद्री व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है, उसकी शुरुआत वर्ष 1931 में एक छोटे से जेट्टी के रूप में हुई थी। लेकिन वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के बाद इसकी अहमियत कई गुना बढ़ गई।
कराची बंदरगाह पाकिस्तान में चले जाने के बाद भारत को पश्चिमी तट पर एक बड़े और आधुनिक बंदरगाह की जरूरत महसूस हुई। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 1950 के दशक में कांडला बंदरगाह का विकास किया गया। यह भारत के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में शामिल हो गया।
साल 2017 में बदला गया नाम
वर्ष 2017 में भारत सरकार ने कांडला पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट कर दिया। यह निर्णय 25 सितंबर 2017 को भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से लिया गया। बंदरगाह का नाम जनसंघ के प्रमुख विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सम्मान में रखा गया।
कितनी है बंदरगाह की क्षमता
इसकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2023-24 में दीनदयाल बंदरगाह ने 132.3 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो का संचालन किया। यह उपलब्धि इसे देश के सबसे अधिक कार्गो संभालने वाले प्रमुख बंदरगाहों में शामिल करती है।
भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
दीनदयाल बंदरगाह का महत्व केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। यह उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है।
कच्छ की खाड़ी में स्थित दीनदयाल बंदरगाह केवल एक समुद्री बंदरगाह नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती, वैश्विक व्यापार और आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक है। एक छोटे जेट्टी से शुरू हुआ इसका सफर आज इसे दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक केंद्रों की कतार में खड़ा करता है।
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