भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें विभिन्न प्रकार के युद्धों के बारे में पढ़ने और सुनने को मिलता है। इनमें से कई युद्ध ऐसे साबित हुए हैं, जिन्होंने भारत के भविष्य पर गहरा प्रभाव डाला था। इनमें से एक युद्ध स्वाली का युद्ध भी गिना जाता है, जिसे भारतीय इतिहास में निर्णायक मोड़ माना जाता है। यह वह युद्ध है, जिसने भारत में अंग्रेजों की नींव रखने में मदद की थी।
कब हुआ था स्वाली का युद्ध
स्वाली का युद्ध 29-30 नवंबर को 1612 में लड़ा गया था। यह भारत में गुजरात के पास सुवाली नामक जगह पर ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेजों और पुर्तगालियों के बीच हुआ था, जो कि एक नौसैनिक युद्ध था।
क्यों हुआ था स्वाली का युद्ध
स्वाली का युद्ध होने के कई कारण थे, क्योंकि उस समय पुर्तगालियों ने भारत के तटों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था। साथ ही, पुर्तगालियों की अपनी कार्टज प्रणाली भी थी। ये कारण इस प्रकार हैंः
पुर्तगालियों का व्यापारिक एकाधिकार
भारत में 16वीं शताब्दी तक भारत के समुद्री रास्तों और व्यापार पर एकाधिकार हो गया था। पुर्तगाली नहीं चाहते थे कि उनके होते हुए कोई और दूसरा विदेशी शक्ति भारत में अपने पैर जमाए। उस समय कैप्टन हॉकिंस और थॉमस बेस्ट ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से व्यापार के इरादे से भारत पहुंचे थे।
सूरत में नहीं खोलने दी फैक्ट्री
भारत में जब अंग्रेज व्यापार के इरादे से आए, तो कैप्टन हॉकिंस ने मुगल सम्राट जहांगीर से सूरत में फैक्ट्री खोलने की अनुमति मांगी, लेकिन पुर्तगालियों ने अपना प्रभाव दिखाते हुए जहांगीर से इस संबंध में अनुमति नहीं देने दी। इस वजह से पुर्तगाली और अंग्रेजों के बीच तनाव बढ़ गया था।
पुर्तगालियों की कार्टज प्रणाली भी थी जिम्मेदार
पुर्तगाली समुद्र में व्यापार करने वाले जहाज से एक विशेष प्रकार का पास मांगते थे। इस पास को कार्टज कहा जाता था, जिसके तहत टैक्स दिया जाता था। यदि कोई जहाज ऐसा नहीं करता था, तो पुर्तगाली उस जहाज पर हमला कर देते थे या फिर जहाज को डुबा देते थे।
पुर्तगालियों ने जहाजों पर किया हमला
1612 में कैप्टन बेस्ट अपने जहाजों के साथ सूरत के पास सुवाली तट पर रूके हुए थे। इस दौरान पुर्तगालियों ने उनके जहाजों पर हमला कर दिया। साथ ही, जहांगीर के भी कुछ जहाजों पर हमला कर दिया। हालांकि, अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को इस युद्ध में हरा दिया। इससे जहांगीर बहुत खुश हुआ और उसने अंग्रेजों को सूरत में फैक्ट्री लगाने की अनुमति दे दी।
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